Rohtak News: रोहतक कोर्ट का बड़ा फैसला, 6 साल जेल में काटने के बाद रेप और पॉक्सो के 7 आरोपी बरी
रोहतक कोर्ट का बड़ा फैसला
Rohtak News: हरियाणा के रोहतक जिले से एक चौकाने वाला न्यायिक फैसला सामने आया है, जहां एडिशनल सेशन जज की अदालत ने सबूतों के अभाव में सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत नामजद सभी 7 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। बचाव पक्ष की मजबूत पैरवी के चलते कोर्ट ने पाया कि पूरा मामला निजी रंजिश के तहत गढ़ा गया था। हालांकि, इस अदालती प्रक्रिया और सुनवाई के दौर में निर्दोष साबित होने से पहले इन युवकों को करीब 6 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े।
यह मामला सांपला थाने का है, जहां 1 अक्टूबर 2020 को शुरुआत में छेड़छाड़ का केस दर्ज कराया गया था। हालांकि, महज 24 घंटे के भीतर शिकायतकर्ता पक्ष ने थाने पहुंचकर बयानों में बदलाव किया और मामले को रेप व पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में तब्दील करवा दिया। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बलराम और बलराज नामक दो सगे भाइयों समेत कुल 7 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
पुरानी रंजिश और बयानों का विरोधाभास आया सामने
अदालत में मामले की पैरवी कर रहे एडवोकेट अभिषेक चौधरी ने केस से जुड़े अहम तथ्यों को सामने रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मुख्य आरोपी बलराम का शिकायतकर्ता महिला के बेटे से किसी बात को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। इसी आपसी रंजिश का बदला लेने की नीयत से शिकायतकर्ता ने अपनी नाबालिग बेटी का सहारा लिया और पहले छेड़छाड़ और फिर रेप का मनगढ़ंत मामला दर्ज कराया।
ढीली मेडिकल रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में मिली खामियां
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट में हुई भारी देरी और विरोधाभासों को प्रमुखता से उठाया। कोर्ट को अवगत कराया गया कि यदि घटना वास्तविक थी, तो पीड़िता की डॉक्टरी जांच कराने में बेवजह देरी क्यों की गई? इसके साथ ही शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी गलत और एडिटेड पाया गया। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि शिकायतकर्ता पक्ष पहले भी कई लोगों के खिलाफ इस तरह की झूठी शिकायतें दर्ज करा चुका था।
26 गवाहों की गवाही के बाद आया अंतिम फैसला
इस लंबे चले मुकदमे में कुल 32 गवाह बनाए गए थे, जिनमें से 26 की गवाही अदालत में दर्ज की गई। गवाहों के बयानों में अंतर, मेडिकल रिपोर्ट में खामियों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के खारिज होने के बाद अदालत ने सभी सातों आरोपियों को निर्दोष माना। 6 साल तक निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक जमानत न मिलने के बाद आखिरकार इन युवकों को इंसाफ मिला है, लेकिन बिना किसी गुनाह के जीवन के छह अहम साल जेल में बीत जाने का दर्द अब भी उनके साथ है।
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