राजस्थान: नगर निकाय चुनाव में भाजपा को बढ़त, निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी दिखाई ताकत

नगर निकाय चुनाव में भाजपा को बढ़त
Rajasthan Municipal Election: राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई है, लेकिन चुनाव परिणामों ने शहरी राजनीति की तस्वीर को एकतरफा नहीं रहने दिया। राज्य के 309 नगर निकायों के लिए हुई मतगणना में भाजपा ने कई बड़े शहरों में मजबूत प्रदर्शन किया, वहीं कांग्रेस ने भी कई अहम शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत होने का दावा किया।
इन चुनावों में सबसे दिलचस्प तस्वीर उन जगहों पर बनी, जहां किसी भी प्रमुख दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा रहा। ऐसे में अब महापौर और नगर निकाय अध्यक्ष के चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर निर्दलीय पार्षदों पर रहेगी।
चार नगर निगमों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत
दिसंबर 2023 में सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार के लिए ये निकाय चुनाव पहली बड़ी प्रदेशव्यापी चुनावी परीक्षा माने जा रहे थे। नतीजों में भाजपा ने 10 नगर निगमों में से जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नतीजों को अपनी सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने ढाई साल से ज्यादा समय में जो काम किए हैं, उन पर जनता ने नगरीय चुनावों में भाजपा को समर्थन दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी परिणामों को पार्टी और सरकार के प्रति जनता का समर्थन बताया। उनका दावा है कि पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा का प्रदर्शन करीब ढाई से तीन गुना बेहतर रहा।
बीकानेर, अजमेर और पाली में कांग्रेस ने बढ़ाई ताकत
कांग्रेस ने भाजपा की बढ़त को स्वीकार करने के बजाय कई बड़े शहरी क्षेत्रों में अपने प्रदर्शन को पार्टी के लिए सकारात्मक बताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि नतीजे बताते हैं कि कांग्रेस ने शहरी मतदाताओं के बीच अपना प्रभाव बढ़ाया है। बीकानेर में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला। अजमेर नगर निगम में भी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। पाली में भी कांग्रेस ने सबसे ज्यादा ताकत दिखाई। इसके अलावा झालावाड़ और टोंक में भी कांग्रेस ने महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया।
इन नतीजों की राजनीतिक अहमियत इसलिए भी है क्योंकि पाली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का गृह नगर है। अजमेर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का क्षेत्र है, जबकि बीकानेर केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अर्जुन राम मेघवाल का राजनीतिक क्षेत्र है।
मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा
भरतपुर का परिणाम भाजपा के लिए खास चर्चा का विषय रहा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भरतपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने यहां पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार भी किया था। इसके बावजूद यहां निर्दलीय उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन किया।
कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भरतपुर समेत अन्य क्षेत्रों के परिणामों का हवाला देते हुए भाजपा के शहरी इलाकों में व्यापक समर्थन के दावे पर सवाल उठाए। हालांकि, भरतपुर समेत कई निकायों में निर्दलीयों की स्थिति अब मेयर और अध्यक्ष के चुनाव के लिहाज से अहम हो गई है।
कोटा में भाजपा, टोंक में कांग्रेस का दबदबा
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के राजनीतिक गढ़ कोटा में भाजपा ने नगर निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। दूसरी ओर, कांग्रेस ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली टोंक नगर परिषद में बहुमत हासिल किया।
जोधपुर में मुकाबला कड़ा रहा। यह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र है और लोकसभा में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इसका प्रतिनिधित्व करते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक प्रभाव वाले झालावाड़ में भी कांग्रेस को जीत मिली। राजे झालरापाटन विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि उनके बेटे दुष्यंत सिंह झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं।
निर्दलीय और छोटे दल अब बनाएंगे समीकरण
नगर निकाय चुनाव के परिणामों में निर्दलीय उम्मीदवार कई जगह भाजपा और कांग्रेस के बीच तीसरी ताकत बनकर उभरे हैं। जिन निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सीधे तौर पर बढ़ गई है।
महापौर और अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दल इन पार्षदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर सकते हैं। कई जगह छोटे दलों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने बहुमत हासिल किया, जबकि बीकानेर जिले की नोखा नगरपालिका में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने निर्णायक जीत दर्ज की।
राजनीतिक विश्लेषक पुनीत शर्मा के मुताबिक, परिणाम भाजपा के लिए संकेत हैं कि अगले विधानसभा चुनाव में सत्ता बनाए रखने के लिए उसे और मेहनत करनी होगी। वहीं विश्लेषक मोहसिन रशीद का मानना है कि इन परिणामों से जमीनी राजनीतिक माहौल का अंदाजा लगाया जा सकता है और इसका असर आगामी पंचायती राज चुनावों के साथ अगले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है।
21 सितंबर को होगा मेयर और अध्यक्ष का फैसला
अब सभी की नजर 21 सितंबर पर है। इसी दिन नगर निकायों के महापौर और अध्यक्ष पद के चुनाव होंगे। जिन निकायों में भाजपा या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन सबसे अहम हो सकता है। ऐसे में चुनाव परिणाम आने के बाद राजस्थान की शहरी राजनीति में अगली लड़ाई बोर्ड बनाने की है, जहां संख्या बल के साथ राजनीतिक प्रबंधन भी निर्णायक भूमिका निभाएगा।
