Patti Tehsil Patwari Strike : तहसील कॉम्प्लेक्स पट्टी में पटवारियों ने मांगों को लेकर दिया धरना
तहसील कॉम्प्लेक्स पट्टी में पटवारियों ने मांगों को लेकर दिया धरना
Patti Tehsil Patwari Strike : पंजाब के पट्टी में प्रशासनिक कामकाज एक बार फिर पटरी से उतरता नजर आ रहा है। रेवेन्यू पटवार यूनियन के आह्वान पर बुधवार को तहसील कॉम्प्लेक्स पट्टी में पटवारियों ने मोर्चा खोल दिया। सुबह से लेकर शाम तक चले इस धरने में कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। इस विरोध प्रदर्शन के चलते तहसील पहुंचे आम लोगों को भी अपने जरूरी काम करवाने के लिए खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सुबह 10 बजे से शाम 3 बजे तक ठप रहा कामकाज, उमड़ी भारी भीड़
बुधवार की सुबह 10 बजते ही पट्टी तहसील कॉम्प्लेक्स में पटवारियों का जुटना शुरू हो गया था, जो दोपहर 3 बजे तक डटे रहे। इस धरने में सिर्फ मौजूदा पटवारी ही नहीं, बल्कि कानूनगो और बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त पटवारी साथी भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार लंबे समय से उनकी जायज मांगों को अनसुना कर रही है, जिसके चलते उन्हें मजबूरन यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है। पांच घंटे तक चले इस धरने के दौरान पूरा परिसर सरकार विरोधी नारों से गूंजता रहा।
वेतन विसंगतियों और खाली पदों को बहाल करने की प्रमुख मांग
धरने की अगुवाई कर रहे यूनियन पदाधिकारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि मुख्य मांगों में 17 जुलाई 2020 और 19 सितंबर 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों की वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करना और वेतन में बढ़ोतरी करना शामिल है। इसके अलावा, साल 2021 के बाद से लटका हुआ महंगाई भत्ता (DA) तुरंत जारी करने की पुरजोर मांग की गई।
कर्मचारियों ने सबसे बड़ा मुद्दा पट्टी तहसील में पदों की कटौती का उठाया। उन्होंने कहा कि कुल 4716 स्वीकृत पटवारी पदों में से संख्या घटाकर अचानक 1012 कर दी गई है, जिसे तुरंत बहाल कर नई भर्तियां निकाली जानी चाहिए ताकि काम का अतिरिक्त बोझ कम हो सके।
कई दिग्गज नेता और कर्मचारी रहे मौजूद, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
इस विरोध प्रदर्शन में तहसील प्रधान अमृतपाल संधू, महासचिव सुखविंदर सिंह भुल्लर, खजांची रणजीत सिंह कंग, हरप्रीत सिंह गिल, गुरसेवक सिंह, जगरूप सिंह, सुखजीत सिंह और हरमनदीप कौर सहित तमाम कर्मचारी मौजूद रहे। इनके अलावा सेवानिवृत्त कानूनगो बसंत सिंह और पूर्व प्रधान अंग्रेज सिंह ने भी धरने में पहुंचकर अपना समर्थन दिया।
यूनियन के नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही बातचीत के जरिए इन मांगों का समाधान नहीं निकाला, तो वे अपने संघर्ष को और अधिक तीव्र करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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