PGI Chandigarh Advisory: दीपावली पर घरों और बाजारों में रोशनी के साथ पटाखों की गूंज भी सुनाई देती है, लेकिन जरा सी लापरवाही त्योहार की खुशियों को अस्पताल के चक्कर में बदल सकती है। चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने पटाखे जलाते समय होने वाले हादसों से बचाव के लिए लोगों को विशेष एडवाइजरी जारी की है। विभाग के एचओडी डॉ. अतुल पराशर ने लोगों से सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पटाखे जलाते समय सिंथेटिक और ढीले कपड़े पहनने से बचना चाहिए। पटाखों से उचित दूरी बनाए रखें और उन्हें जलाते समय हाथों को शरीर से दूर रखें। इसके अलावा घरों में दीये और मोमबत्तियां जलाते समय भी जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
डॉ. अतुल पराशर के मुताबिक, पटाखा जलाने के बाद अगर वह नहीं फूटता है तो उसे दोबारा जलाने या उठाने की कोशिश बिल्कुल न करें। ऐसा करने पर अचानक विस्फोट हो सकता है और हाथों या चेहरे पर गंभीर चोट लग सकती है। पटाखे जलाने के बाद उनके अवशेष इधर-उधर फेंकने के बजाय पानी या रेत से भरी बाल्टी में डालने चाहिए। इससे जले हुए पटाखों के कारण पैरों में चोट लगने और आग फैलने का खतरा कम होगा। पटाखे जलाते समय पैरों में जूते पहनना भी जरूरी है। उन्होंने लोगों को पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण के प्रति भी जागरूक किया। यथासंभव ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करने और प्रशासन की ओर से निर्धारित समय-सीमा का पालन करने की सलाह दी गई है।
जलने पर पानी डालें, टूथपेस्ट या नीली स्याही न लगाएं
पटाखे या किसी अन्य वजह से त्वचा जलने पर सबसे पहले प्रभावित हिस्से को पर्याप्त साफ और ठंडे बहते पानी से ठंडा करना चाहिए। इससे त्वचा को और नुकसान पहुंचने से बचाने में मदद मिलती है। जले हुए हिस्से पर टूथपेस्ट, नीली स्याही या घरेलू नुस्खों के तौर पर इस्तेमाल होने वाले दूसरे पदार्थ नहीं लगाने चाहिए। डॉ. पराशर ने यह भी सलाह दी कि हाथों में अंगूठी, चूड़ियां या अन्य कसने वाली चीजें हों तो उन्हें तुरंत हटा दें। जलने के बाद प्रभावित हिस्से में सूजन आ सकती है, जिससे बाद में इन चीजों को निकालना मुश्किल हो सकता है। अगर जलने की चोट गंभीर है, त्वचा पर फफोले पड़ गए हैं या प्रभावित हिस्सा ज्यादा बड़ा है तो घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
दीपावली के दौरान पटाखों से कपड़ों में आग लगना गंभीर हादसों की वजह बन सकता है। ऐसी स्थिति में घबराकर भागना नहीं चाहिए, क्योंकि तेज दौड़ने से आग को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है और लपटें तेजी से फैल सकती हैं। PGI ने इसके लिए ‘स्टॉप, ड्रॉप एंड रोल’ तकनीक अपनाने की सलाह दी है। इसका मतलब है कि कपड़ों में आग लगते ही तुरंत रुक जाएं, जमीन पर लेट जाएं और शरीर को लुढ़काएं। इससे आग को ऑक्सीजन मिलना कम होता है और लपटें बुझाने में मदद मिलती है। आग बुझाने के लिए मोटे कंबल या गलीचे का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि, आग बुझने के बाद भी जले हुए हिस्से पर घरेलू चीजें लगाने के बजाय चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
आंख में चोट लगे तो बिल्कुल न रगड़ें
पटाखों की चिंगारी, धुआं या छोटे कण आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में आंख में चोट लगने पर उसे हाथ से रगड़ना नहीं चाहिए। साफ पानी से आंख को धोएं और तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें। अगर आंख में कोई कण फंस गया हो या चोट गंभीर हो तो उसे खुद निकालने की कोशिश न करें। PGI ने लोगों को दीये, मोमबत्तियां और पटाखे जलाते समय आसपास पानी से भरी बाल्टी या अग्निशामक यंत्र रखने की सलाह भी दी है। इससे आग लगने की स्थिति में तुरंत बचाव किया जा सकता है।
डॉ. अतुल पराशर ने बताया कि दीपावली के दौरान जलने से संबंधित चोटों के मरीजों के इलाज के लिए PGI में पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई हैं। अस्पताल ने आपात स्थिति में मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की तैयारी की है। डॉक्टरों की सलाह है कि त्योहार के उत्साह में सुरक्षा को नजरअंदाज न करें। थोड़ी सी सावधानी हाथों, चेहरे और आंखों को गंभीर चोट से बचा सकती है और परिवार की दिवाली को सुरक्षित रख सकती है।
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