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लोकसभा में पेश हुआ पेपर लीक पर सख्त कानून वाला विधेयक, दोषियों को 10 साल तक जेल और 50 लाख तक जुर्माने का प्रस्ताव

लोकसभा में पेश हुआ पेपर लीक पर सख्त कानून वाला विधेयक, दोषियों को 10 साल तक जेल और 50 लाख तक जुर्माने का प्रस्ताव

लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पेश

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VVinita Kohli

Public Examination Bill 2026: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अनुचित साधनों के मामलों पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया। प्रस्तावित संशोधन में पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए सख्त सजा, समयबद्ध जांच और त्वरित सुनवाई की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। विधेयक ऐसे समय लाया गया है जब देश में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में विश्वास मजबूत करना और संगठित तरीके से होने वाले पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगाना है।

 

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पेपर लीक पर 10 साल तक जेल और 50 लाख तक जुर्माने का प्रस्ताव

लोकसभा सदस्यों को वितरित विधेयक की प्रति के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति प्रश्नपत्र लीक करने या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है। इसके साथ 50 लाख रुपये तक जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि सख्त दंड के प्रावधान परीक्षा माफिया और संगठित गिरोहों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई में मदद करेंगे।

 

संगठित अपराधों के लिए और सख्त प्रावधान

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन के तहत संगठित अपराधों के लिए अलग से कठोर प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। ऐसे मामलों में कम से कम सात वर्ष के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इन संशोधनों का उद्देश्य उन संगठित नेटवर्क पर कार्रवाई करना है, जो बड़े स्तर पर प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में धांधली जैसी गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं।

 

दो महीने में जांच, तीन महीने में मुकदमे का निपटारा

विधेयक में जांच एजेंसियों के लिए भी समयसीमा तय करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत सभी मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने का भी प्रस्ताव है। इन अदालतों को आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करनी होगी, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके।

 

विपक्ष के हंगामे के बीच पेश हुआ विधेयक

विधेयक उस समय लोकसभा में पेश किया गया जब विपक्षी सदस्य दिल्ली में 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे थे। विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में सदन में जवाब देने की मांग करते हुए हंगामा कर रहा था। हंगामे के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में विधेयक पेश किया।

 

परीक्षा सुधारों पर सरकार का जोर

सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाने की बात कही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित करने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि कानून के साथ-साथ संस्थागत सुधारों के जरिए भी परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाया जाएगा।

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