Punjab Election Commission: पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की तैनाती को लेकर निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। निर्देशों के मुताबिक, चुनाव से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं रखा जाएगा। पिछले चार वर्षों के दौरान किसी जिले में तीन साल की सेवा पूरी कर चुके अधिकारियों को भी जिले से हटाना होगा। यह नियम उन अधिकारियों पर भी लागू होगा, जो निर्धारित कट-ऑफ तारीख तक संबंधित जिले में तीन साल पूरे कर लेंगे।
निर्देशों के दायरे में जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), रिटर्निंग ऑफिसर (RO), सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (ARO) और पुलिस निरीक्षक के साथ सब-इंस्पेक्टर (SI) या उससे ऊपर के अधिकारी शामिल हैं। चुनाव सुरक्षा और पुलिस बल की तैनाती से जुड़े अधिकारियों पर भी ये नियम लागू होंगे। सब-इंस्पेक्टर को गृह जिले में तैनात नहीं किया जाएगा। आयोग के निर्देशों के अनुसार, इन पदों पर तैनात अधिकारियों को उस विधानसभा क्षेत्र या जिले में दोबारा तैनात नहीं किया जाएगा, जहां वे पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए उपचुनाव के दौरान तैनात थे। यह व्यवस्था केवल जिला प्रशासन और पुलिस तक सीमित नहीं है। संबंधित पुलिस, आबकारी और परिवहन विभागों के अधिकारियों पर भी निर्देश लागू होंगे। जिन अधिकारियों के आधिकारिक कार्यों से जुड़े आपराधिक मामले अदालत में लंबित हैं, उन्हें चुनाव संबंधी जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी।
चुनाव आयोग की 10 सदस्यीय टीम पंजाब पहुंची
चुनाव तैयारियों का जायजा लेने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के वरिष्ठ अधिकारियों की 10 सदस्यीय टीम पंजाब पहुंच गई है। यह टीम 27 और 28 अक्टूबर को राज्य में प्रशासनिक और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा कर रही है।वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्तों और महानिदेशकों के नेतृत्व में आई टीम चंडीगढ़ में पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकें करेगी। इसके बाद आयोग के अधिकारी विभिन्न जिलों में जाकर जमीनी स्तर पर तैयारियों का निरीक्षण करेंगे।
चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय में होने वाली बैठकों में चुनाव प्रबंधन, कानून-व्यवस्था, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और मतदान केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की जाएगी। राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख भी इन बैठकों में शामिल होंगे। संवेदनशील इलाकों और वहां सुरक्षा बलों की तैनाती पर विशेष चर्चा की जाएगी।
CEO देंगी प्रेजेंटेशन, संवेदनशील बूथों पर रहेगा फोकस
चुनाव आयोग के सचिव सुमन कुमार दास की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंदिता मिश्रा संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक में विस्तृत प्रेजेंटेशन देंगी। इसमें चुनाव से जुड़ी तैयारियों की जानकारी साझा की जाएगी। केंद्रीय टीम जिलों के डिप्टी कमिश्नरों (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) के साथ भी सीधे संवाद करेगी। इसके लिए आयोग की टीमें अलग-अलग जिलों का दौरा करेंगी। जिन जिलों में संवेदनशील मतदान केंद्रों की संख्या अधिक है, वहां सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर खास ध्यान दिया जाएगा। आयोग की टीम का दौरा चुनाव की घोषणा से पहले तैयारियों की स्थिति समझने के लिहाज से अहम है। हालांकि, टीम के दौरे के आधार पर चुनाव की घोषणा की तारीख तय मानना अभी उचित नहीं होगा। इसकी आधिकारिक घोषणा निर्वाचन आयोग ही करेगा।
2022 में आयोग के दौरे के 24 दिन बाद हुई थी घोषणा
पंजाब में चुनाव की तारीखों को लेकर पिछले विधानसभा चुनाव का घटनाक्रम भी चर्चा में है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले आयोग की टीम 15 और 16 दिसंबर 2021 को पंजाब के दौरे पर आई थी। इसके बाद 8 जनवरी 2022 को चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया था। उस चुनाव में 20 फरवरी 2022 को मतदान हुआ था, जबकि मतगणना 10 मार्च को हुई थी। इस तरह आयोग के दौरे और चुनाव घोषणा के बीच 24 दिन का अंतर रहा था।
इसी पिछली समय-सीमा के आधार पर इस बार भी चुनाव की घोषणा और मतदान को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिसंबर के मध्य के बाद घोषणा और फरवरी में मतदान की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, यह फिलहाल अनुमान है और चुनाव आयोग ने इन तारीखों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पंजाब में मुख्यमंत्री के कार्यकाल की समय-सीमा को देखते हुए विधानसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया समय पर संपन्न कराना जरूरी होगा। आयोग की मौजूदा टीम राज्य में प्रशासनिक तैयारियों, अधिकारियों की तैनाती, मतदाता सूची और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रही है। इसके बाद ही चुनावी कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
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