Rahul Gandhi Vs Anil Vij: अंबाला। नीट पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में जारी सियासी घमासान अब बेहद तीखा मोड़ ले चुका है। राजधानी दिल्ली में कांग्रेस सांसदों और कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास के घेराव पर हरियाणा के तेजतर्रार कैबिनेट मंत्री अनिल विज बेहद आक्रामक नजर आए। अनिल विज ने राहुल गांधी के इस कदम पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पीएम आवास के बाहर धरना देकर देश के नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाला है।
विज ने दो टूक शब्दों में मांग की कि इस हरकत के लिए राहुल गांधी के खिलाफ प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध लगाने का आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
“हाई-सिक्योरिटी जोन में अराजकता बर्दाश्त नहीं, संसद में करें बात”
अनिल विज ने बेहद कड़े लहजे में कहा कि प्रधानमंत्री आवास और उसका आसपास का इलाका देश का सबसे संवेदनशील ‘हाई-सिक्योरिटी जोन’ है। वहां इस तरह बिना अनुमति के भीड़ जुटाना और प्रदर्शन करना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए विज ने कहा, “ऐसी अति-संवेदनशील जगह पर प्रदर्शन के दौरान कोई भी असमाजिक या शरारती तत्व भीड़ का फायदा उठाकर घुस सकता था। अगर वहां कोई अनहोनी या बड़ी दुर्घटना हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती? कानून को हाथ में लेने वालों को बिल्कुल नहीं बख्शा जाना चाहिए।”
विज ने आगे कहा कि राहुल गांधी देश की संसद में नेता प्रतिपक्ष की संवैधानिक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अगर उन्हें छात्रों के मुद्दे पर बात करनी है, तो उनके लिए संसद का मंच खुला हुआ है। वे वहां अपनी बात रखें, उन्हें कौन रोकता है? लेकिन सड़कों पर इस तरह का ड्रामा रचना लोकतंत्र के अनुकूल नहीं है।
अखिलेश यादव के आरोपों पर विज का पलटवार: ‘सबूत हैं तो एजेंसियों को सौंपें’
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा भाजपा सरकार पर नीट परीक्षा कराने में पूरी तरह नाकाम रहने और बीजेपी नेताओं के धांधली में शामिल होने के आरोपों पर भी अनिल विज ने जोरदार जवाब दिया।
विज ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की शीर्ष सुरक्षा और जांच एजेंसियां पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ नीट मामले की जांच में जुटी हुई हैं। अगर अखिलेश यादव या किसी भी अन्य विपक्षी नेता के पास धांधली से जुड़ा कोई ठोस सबूत या दस्तावेज मौजूद है, तो वे सार्वजनिक बयानबाजी करने के बजाय जांच एजेंसियों के पास जाएं। एजेंसियों में उन सबूतों का स्वागत किया जाएगा और निष्पक्ष जांच के आधार पर ही सच सामने आएगा।
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