August 20, 2026

Raksha Bandhan: रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त, 28 अगस्त को किस समय बांधें राखी? जानिए राहुकाल और भद्रा का सही समय

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Raksha Bandhan: रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त, 28 अगस्त को किस समय बांधें राखी? जानिए राहुकाल और भद्रा का सही समय

रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त, 28 अगस्त को किस समय बांधें राखी?

Raksha Bandhan: सावन मास का सबसे बड़ा और प्रतीक्षित त्योहार रक्षाबंधन इस वर्ष 28 अगस्त, शुक्रवार को श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। बहनों को हर साल इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है, जब वे अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी दीर्घायु और समृद्धि की कामना करती हैं। पौराणिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन का पर्व हमेशा भद्रा रहित काल में ही मनाना फलदायी होता है। शास्त्र कहते हैं कि भद्रा से मुक्त शुभ मुहूर्त में बांधी गई राखी पूरे वर्ष भाई के जीवन में उन्नति और खुशहाली लाती है।

इस बार रक्षाबंधन के दिन तिथि और ग्रहों का अनूठा संयोग बन रहा है। पंचांग के मुताबिक, 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा तिथि सुबह 09:48 बजे तक रहेगी। हालांकि पूर्णिमा का प्रभाव पूरे दिन माना जाएगा, लेकिन राखी बांधने के लिए सुबह का समय सबसे श्रेष्ठ बताया गया है।

राखी बांधने का शुभ समय और मुख्य मुहूर्त

रक्षाबंधन के दिन सुबह 05 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक राखी बांधने का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा, जो लोग सुबह के समय राखी नहीं बांध पाते हैं, वे दिन के अन्य शुभ चौघड़िया और मुहूर्तों में भी यह रस्म पूरी कर सकते हैं।

दिन के प्रमुख मुहूर्तों की बात करें तो प्रातःकाल 04:28 बजे से 05:12 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा, जो स्नान और पूजा-पाठ के लिए सर्वोत्तम है। इसके बाद दोपहर 11:56 बजे से 12:48 बजे तक अभिजीत मुहूर्त और दोपहर 02:31 बजे से 03:22 बजे तक विजय मुहूर्त रहेगा। रात्रि के समय पूजा के लिए निशिता मुहूर्त देर रात 12:00 बजे से अगले दिन यानी 29 अगस्त की मध्य रात्रि 12:45 बजे तक रहेगा।

राहुकाल और यमगंड: इन समयों में भूलकर भी न बांधें राखी

शुभ कार्य में समय के सही चयन का विशेष महत्व है। रक्षाबंधन के दिन सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक राहुकाल रहेगा। ज्योतिषशास्त्र में राहुकाल के दौरान किसी भी धार्मिक या शुभ कार्य की मनाही होती है।

इसके साथ ही, यमगंड के समय का भी त्याग करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि इसका सीधा संबंध मृत्यु के देवता यमराज से है। रक्षाबंधन पर यमगंड काल दोपहर 03 बजकर 35 मिनट से शाम 05 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। इन दोनों समयों के दौरान बहनों को भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने से बचना चाहिए।

अतिगंड के बाद शुरू होगा सुकर्मा योग, शतभिषा नक्षत्र का रहेगा संयोग

पंचांग गणना के अनुसार, 28 अगस्त को सूर्योदय से लेकर सुबह 07 बजकर 28 मिनट तक ‘अतिगंड योग’ रहेगा। इसे ज्योतिष में विघ्न-बाधाएं पैदा करने वाला माना जाता है। लेकिन इसके तुरंत बाद, यानी सुबह 07:28 बजे से ‘सुकर्मा योग’ का प्रारंभ होगा। मंगल और इंद्रदेव के स्वामित्व वाला यह योग अत्यंत फलदायी माना गया है, जिसमें किए गए कार्यों में निसंदेह सफलता मिलती है।

नक्षत्रों की बात करें तो इस बार रक्षाबंधन पर दिनभर शतभिषा नक्षत्र रहेगा, जो 29 अगस्त को तड़के 03:13 बजे तक विद्यमान रहेगा। रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण की स्थिति भी बन रही है, हालांकि भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। इन सभी ग्रह-नक्षत्रों के गणित को ध्यान में रखकर यदि बहनें सही मुहूर्त में राखी बांधती हैं, तो यह पर्व परिवार में सुख, समृद्धि और मिठास लेकर आएगा।

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