Rohtak News: रोहतक के सुखपुरा चौक से जींद बाईपास रोड स्थित छोटू राम नगर की गली नंबर-1 में दबंगई का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां कुछ प्रोपर्टी डीलरों ने मुनाफे की खातिर एक पुराने और पुख्ता सार्वजनिक रास्ते पर लोहे का गेट जड़कर उसे हमेशा के लिए बंद कर दिया है। इस तानाशाहीपूर्ण रवैये से परेशान कॉलोनी के दर्जनों लोग न्याय की आस में नगर निगम कमिश्नर सितेंद्र दुहन के दरबार पहुंचे और लिखित शिकायत देकर रास्ता तुरंत खुलवाने की मांग की। कमिश्नर ने लोगों को आश्वस्त किया है कि दस्तावेजों की गहन जांच के बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रजिस्ट्री में दर्ज है 20 फीट चौड़ा रास्ता, निगम ने भी कराई थी सुविधाएं
छोटूराम नगर निवासी सतबीर सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए बताया कि उनके मकानों की मूल रजिस्ट्री में यह रास्ता साफ तौर पर 20 फीट चौड़ा दर्ज है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नगर निगम ने खुद यहां पक्की सड़क का निर्माण कराया है, पीने के पानी की पाइपलाइन बिछाई है और बिजली व्यवस्था के लिए ट्रांसफार्मर तक स्थापित किया है। इसके बावजूद भूमाफियाओं और जमीन के पुराने मालिकों ने मिलीभगत कर इस आम रास्ते को अपनी निजी संपत्ति घोषित करने की कोशिश शुरू कर दी।
मुनाफे के खेल में भूमाफियाओं ने जड़ा ताला
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रोपर्टी डीलर इस खाली जमीन या बची हुई गली को अपने निजी प्लॉट के रूप में बेचकर मोटा मुनाफा कमाना चाहते हैं। इसी लालच में उन्होंने मनमाने ढंग से रास्ते पर फर्जी नोटिस चस्पा किए और रातों-रात लोहे का भारी-भरकम गेट लगाकर ताला लगा दिया। इस रास्ते के बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों, महिलाओं और सुबह-शाम टहलने वाले बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है।
एक रास्ता फ्लाईओवर की भेंट चढ़ा, दूसरा ताले में कैद
संकट की यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जींद बाईपास फ्लाईओवर के निर्माण कार्य के चलते कॉलोनी का एक मुख्य रास्ता पहले से ही बदहाल और बाधित चल रहा था। अब इस एकमात्र बचे हुए सुगम रास्ते पर ताला लग जाने से आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। हालात यह हैं कि कॉलोनी के भीतर न तो स्कूल बसें आ पा रही हैं और न ही गंभीर मरीजों के लिए कोई एम्बुलेंस पहुंच सकती है। निवासियों का कहना है कि बारिश के दिनों में वैकल्पिक रास्तों की हालत इतनी खराब होती है कि कई बार ऑटो पलटने से बड़े हादसे हो चुके हैं।
2016 से चल रहा विवाद, अब आर-पार के मूड में जनता
स्थानीय निवासी चंद्रकला ने बताया कि इस रास्ते को लेकर विवाद साल 2016 से चला आ रहा है। पहले किसी तरह आपसी समझौते या प्रशासनिक दखल से रास्ता खुल जाता था, लेकिन इस बार प्रोपर्टी डीलरों ने हदें पार करते हुए इसे स्थायी तौर पर सील कर दिया है। पुलिस चौकी में शिकायत देने के बावजूद जब कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो लोग कमिश्नर के पास पहुंचे। निगम के एसडीओ और जेई ने मौके का मुआयना पहले ही कर लिया है, और अब कमिश्नर ने दस्तावेजों की जांच के लिए एक हफ्ते का वक्त मांगा है।
कॉलोनी के लोगों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे शांतिप्रिय लोग हैं और कानून के दायरे में रहकर अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन यदि तय समय सीमा के भीतर निगम प्रशासन ने इस अवैध कब्जे को नहीं हटाया और रास्ता बहाल नहीं किया, तो वे सड़कों पर उतरकर एक बड़ा और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


