August 3, 2026

Sakshi Chaudhary: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भिवानी की बेटी का स्वर्णिम पंच, साक्षी चौधरी ने जीता गोल्ड मेडल

0
Sakshi Chaudhary: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भिवानी की बेटी का स्वर्णिम पंच, साक्षी चौधरी ने जीता गोल्ड मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भिवानी की बेटी का स्वर्णिम पंच, साक्षी चौधरी ने जीता गोल्ड मेडल

Sakshi Chaudhary: हरियाणा के भिवानी जिले के छोटे से गांव धनाना से निकली मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का डंका बजाया है। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए साक्षी ने स्वर्णिम पंच लगाया और देश की झोली में गोल्ड मेडल डाल दिया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद साक्षी ने एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए अपना यह पदक 1.6 अरब भारतवासियों को समर्पित किया है।

तीन बार की वर्ल्ड चैंपियन और अब कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट साक्षी ने वीडियो में कहा, “मैं यह मेडल पूरे देश को समर्पित करती हूं। आप सभी इसी तरह अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें। मुझे पूरी उम्मीद है कि इस हौसले के दम पर मैं आगामी एशियन गेम्स और ओलंपिक में भी देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लाऊंगी।” साक्षी ने अपनी इस कामयाबी के लिए बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI), साई (SAI), भारतीय सेना, अपने परिवार और सभी कोचों का आभार व्यक्त किया।

5-0 से एकतरफा जीत, विरोधी को नहीं दिया संभलने का मौका

रिंग के भीतर साक्षी का दबदबा शुरुआत से ही देखने को मिला। 51 किलोग्राम भारवर्ग के मुकाबले में साक्षी ने अपनी रणनीति से प्रतिद्वंद्वी को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। उन्होंने अपने बाएं हाथ का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए विरोधी मुक्केबाज के हमलों को नाकाम किया और दाहिने हाथ से सटीक व करारे पंच जड़े। साक्षी के सीधे चेहरे पर पड़े पंचों ने मुकाबले का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया।

साक्षी ने सर्वसम्मत फैसले (5-0) से जीत दर्ज करते हुए पोडियम में शीर्ष स्थान हासिल किया। इससे पहले सेमीफाइनल में भी उन्होंने अपनी बेहतरीन तकनीक के दम पर कनाडा की मजबूत मुक्केबाज अंबर जाने वाल को 5-0 से शिकस्त देकर फाइनल में जगह बनाई थी। पूरे टूर्नामेंट के दौरान साक्षी की स्पीड और पंचिंग कॉम्बिनेशन का कोई तोड़ विपक्षी बॉक्सर नहीं ढूंढ सके।

किसान की बेटी, भाई सेना में: संघर्ष से सफलता तक का सफर

साक्षी की इस उपलब्धि से पूरे भिवानी और धनाना गांव में जश्न का माहौल है। उनके पिता मनोज कुमार एक साधारण किसान हैं, जो खेती-बाड़ी करके परिवार का गुजर-बसर करते हैं, जबकि मां शीला देवी गृहिणी हैं। दो भाई-बहनों में साक्षी का छोटा भाई भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहा है।

साक्षी ने साल 2012 में मुक्केबाजी के गुर सीखने शुरू किए थे। खेल के साथ-साथ वे पढ़ाई में भी अव्वल रही हैं; एमए की डिग्री पूरी करने के बाद फिलहाल वे एमबीए की पढ़ाई कर रही हैं। एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाली साक्षी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

यह भी पढ़ें– Brij Bhushan Acquitted: महिला पहलवान शोषण मामला, दिल्ली कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को किया बरी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed