Skincare Tips: निखरी और बेदाग त्वचा पाने की होड़ में आजकल हर कोई घरेलू नुस्खों की तरफ भाग रहा है। सोशल मीडिया पर जहां एक तरफ कोरियन ब्यूटी सीक्रेट बताकर चावल के पानी को चमत्कारी टोनर की तरह पेश किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुराने जमाने से चला आ रहा गुलाब जल भी हर घर की पहली पसंद बना हुआ है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जिस नुस्खे को आप बिना सोचे-समझे अपने चेहरे पर लगा रहे हैं, वह आपकी त्वचा की जरूरतों से मेल भी खाता है या नहीं? खासकर भारत जैसे देश में, जहां मौसम का मिजाज पल-पल बदलता है और धूप, धूल व उमस से स्किन की जरूरतें बदलती रहती हैं, वहां गलत टोनर का चुनाव फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है।
चावल का पानी टोनर के रूप में कितना असरदार?
चावल को भिगोने या उबालने के बाद मिलने वाले पानी में स्टार्च और कुछ खास पौष्टिक तत्व होते हैं, जो लगाने के तुरंत बाद त्वचा को चिकना और मुलायम महसूस कराते हैं। सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली कंपनियां भी चावल के तत्वों का इस्तेमाल अपने प्रोडक्ट्स में करती हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि घर में कटोरी में बनाया गया चावल का पानी और लैब में तैयार कॉस्मेटिक फॉर्मूला एक जैसा नहीं होता।
घर पर तैयार चावल के पानी में कोई प्रिजर्वेटिव नहीं होता। इसे लंबे समय तक फ्रिज में रखने या फर्मेंट करने से इसमें खतरनाक बैक्टीरिया पनप सकते हैं। यदि आपकी त्वचा संवेदनशील या एक्ने-प्रोन है, तो यह अनियंत्रित घरेलू घोल आपके पोर्स को ब्लॉक कर सकता है। इसके अलावा, चावल का पानी गहरे पिगमेंटेशन या बड़े पोर्स का कोई स्थायी इलाज नहीं है।
गुलाब जल की ताजगी के पीछे का सच
गुलाब जल का इस्तेमाल सदियों से त्वचा को ठंडक और ताज़गी देने के लिए किया जाता रहा है। यह धूप से आई थकान को मिटाने और माइल्ड हाइड्रेशन देने में काफी मददगार होता है। लेकिन बाजार में मिलने वाले हर गुलाब जल पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता।
बाजार में उपलब्ध कई ब्रांड्स के गुलाब जल में सिंथेटिक फ्रैग्रेंस (खुशबू), अल्कोहल या अन्य प्रिजर्वेटिव मिलाए जाते हैं। महज “100% नेचुरल” का टैग लगे होने से कोई प्रोडक्ट सुरक्षित नहीं हो जाता। कृत्रिम खुशबू वाले प्रोडक्ट्स रेडनेस, एलर्जी या स्किन बैरियर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए संवेदनशील त्वचा वालों को गुलाब जल चुनते समय उसके इंग्रीडिएंट्स का लेबल ध्यान से पढ़ना चाहिए।
भारतीय मौसम और त्वचा के लिहाज से क्या चुनें?
भारतीय त्वचा में ऑयली, ड्राई, कॉम्बिनेशन और सेंसिटिव स्किन का मिला-जुला दायरा है। इसके साथ ही गर्मियों की तीखी धूप, मॉनसून की चिपचिपाहट और सर्दियों का सूखापन स्किन पर अलग असर डालता है।
गर्म और उमस भरे मौसम में चावल के पानी जैसी भारी चीजें लगाने से ऑयली स्किन पर पिंपल्स आ सकते हैं। वहीं सर्दियों या एसी (AC) में ज्यादा रहने से स्किन ड्राई होने लगती है, जहां सिर्फ गुलाब जल का स्प्रे काफी नहीं होता। विशेषज्ञों की मानें तो किसी एक घरेलू नुस्खे को ‘बेस्ट’ बताने के बजाय बिना खुशबू (Fragrance-free) वाला सिंपल हाइड्रेटिंग टोनर चुनना ज्यादा सुरक्षित है, जिसमें ग्लिसरीन या पैंथेनॉल जैसे तत्व हों।
क्या टोनर लगाना वाकई अनिवार्य है?
स्किनकेयर की दुनिया में फैले मिथकों के विपरीत, टोनर आपकी दैनिक रूटीन का कोई अनिवार्य हिस्सा नहीं है। अगर आपकी त्वचा स्वस्थ है, तो आपको टोनर पर फालतू पैसे खर्च करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। किसी भी व्यक्ति के लिए एक जेंटल क्लींजर (फ़ेस वॉश), अच्छा मॉइश्चराइजर और दिन के समय ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन—ये तीन चीजें ही त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त हैं।
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