Sonipat News: हरियाणा के सोनीपत जिले के गन्नौर क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां के शाहपुर तगा गांव स्थित श्री 108 बाबा मोहनदास गोशाला परिसर में खेलते-खेलते पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में उतरने से दो मासूम सगे भाइयों की जान चली गई। एक दिन पहले ही रोजी-रोटी की तलाश और गोवंश सेवा के लिए परिवार के साथ यहां पहुंचे मजदूर दंपति की दुनिया इस हादसे ने वीरान कर दी। सूचना मिलने पर थाना बड़ी पुलिस तुरंत हरकत में आई और दोनों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर सोनीपत के सिविल अस्पताल भिजवाया।
एक दिन पहले ही उत्तर प्रदेश से पहुंचे थे परिवार के साथ
हादसे का शिकार हुए बच्चों के पिता संदीप मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिनौली गांव के रहने वाले हैं। संदीप अपने परिवार के साथ शाहपुर तगा स्थित बाबा मोहनदास गोशाला में रहते हैं और यहां गोवंश को चारा डालने का काम संभालते हैं। बुधवार को ही वह अपने परिवार के साथ गांव से लौटकर गोशाला पहुंचे थे और परिसर में ही बने आवास में रह रहे थे। गुरुवार का दिन इस परिवार के लिए ऐसी काली शाम लेकर आया, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। संदीप के 7 वर्षीय बेटे सागर और 6 वर्षीय छोटे बेटे कार्तिक को क्या पता था कि गोशाला परिसर में खेल-खेल में उनका यह आखिरी दिन साबित होगा।
शेड निर्माण के लिए खोदे गए थे गड्ढे, बारिश ने बढ़ाई आफत
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गोशाला परिसर में शेड लगाने का कार्य प्रस्तावित था, जिसके लिए बुधवार को जेसीबी मशीन मंगवाकर करीब 12 गड्ढे खुदवाए गए थे। इन गड्ढों में पिलर खड़े किए जाने थे और गुरुवार को ही मिस्त्रियों को बुलाकर निर्माण कार्य आरंभ होना था। हालांकि, मौसम का मिजाज बदला और तेज बारिश के कारण काम शुरू नहीं हो सका। लगातार हुई मूसलाधार बारिश से गोशाला परिसर में जगह-जगह जलभराव हो गया, जिससे शेड के लिए खोदे गए ये गड्ढे भी पानी से पूरी तरह लबालब भर गए।
गहराई का अंदाजा न होने से गहरे पानी में उतरे मासूम
गुरुवार शाम को जब बारिश रुकी, तो दोनों बच्चे गोशाला परिसर में खेलने लगे। खेलते-खेलते दोनों भाइयों का ध्यान पानी से भरे इन गड्ढों की ओर चला गया। नासमझ बच्चों को इन गड्ढों की वास्तविक गहराई का कोई अंदाजा नहीं था और वे नहाने के इरादे से पानी में उतर गए। पानी अधिक होने और गहराई ज्यादा होने के कारण वे खुद को संभाल नहीं सके और उसी में डूब गए। इस बीच बच्चों की मां ने जब उनके कपड़े समेटे, तो उन्हें लगा कि बच्चे कपड़े उतारकर आसपास कहीं खेल रहे होंगे, इसलिए उन्होंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
घंटों तलाशने के बाद गोशाला कर्मचारियों ने खोजे शव
शाम करीब साढ़े चार बजे के बाद अचानक दोनों बच्चों के दिखाई न देने पर परिजनों की बेचैनी बढ़ गई। परिवार के सदस्यों ने गोशाला परिसर और उसके आसपास के कोनों में बच्चों की तलाश शुरू कर दी। जब वे काफी देर तक नहीं मिले, तो परिजनों को यह आशंका हुई कि शायद वे पास में ही चल रहे किसी शादी समारोह में चले गए होंगे।
परिवार के लोग उस समारोह स्थल पर भी पहुंचे और चप्पे-चप्पे पर खोजबीन की, लेकिन वहां भी बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला। जैसे-जैसे वक्त बीतता गया, परिजनों की सांसे अटकने लगीं। आखिरकार, जब गोशाला के अन्य कर्मचारियों ने पानी से भरे गड्ढों के पास तलाश की, तो दोनों मासूमों के शव उसी में मिले। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर परिजनों की चीखें निकल गईं और पूरे इलाके में मातम पसर गया।
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