Tarn Taran Hospital Scam: पंजाब के तरनतारन जिले के पट्टी स्थित सिविल अस्पताल में सरकारी फंड के इस्तेमाल को लेकर करीब एक करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की ऑडिट टीम की प्रारंभिक जांच में वित्तीय रिकॉर्ड में बड़ी अनियमितताएं मिली हैं। इस मामले में अस्पताल में आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम करने वाले गुरिंदरपाल सिंह पर सरकारी राशि में गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद से ऑपरेटर ड्यूटी पर नहीं पहुंच रहा और उसका मोबाइल फोन भी बंद बताया जा रहा है। दूसरी ओर, उसके परिवार ने पुलिस के पास उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अस्पताल के कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की जिम्मेदारी कंप्यूटर ऑपरेटर के पास थी। इसी दौरान कथित तौर पर फर्जी आईडी तैयार करके सरकारी खातों से पैसे निकलवाए गए। विभाग अब पूरे मामले की जांच कर रहा है। फिलहाल एक करोड़ रुपये की राशि को प्रारंभिक अनियमितताओं के तौर पर देखा जा रहा है। वास्तविक हेराफेरी और इसमें शामिल लोगों की संख्या विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
2018 से अस्पताल में काम कर रहा था कंप्यूटर ऑपरेटर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरिंदरपाल सिंह वर्ष 2018 से पट्टी सिविल अस्पताल में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर सेवाएं दे रहा था। वह आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से अस्पताल में तैनात था। बताया जा रहा है कि उसके माता-पिता भी इसी अस्पताल में लैबोरेटरी टेक्नीशियन के तौर पर काम कर चुके हैं। उसका पैतृक गांव घरियाला बताया गया है। आरोपों के मुताबिक, अस्पताल के कर्मचारियों के वेतन और दूसरे खर्चों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड का काम धीरे-धीरे उसके जिम्मे आ गया था। इसी दौरान कथित रूप से फर्जी आईडी तैयार करके सरकारी राशि में गड़बड़ी की जाती रही। प्रारंभिक आरोपों में यह गड़बड़ी करीब छह वर्षों से चलने की आशंका जताई गई है। मामला उजागर होने के बाद गुरिंदरपाल सिंह के ड्यूटी पर नहीं आने की बात सामने आई। उसका मोबाइल फोन भी बंद बताया जा रहा है। इस बीच परिवार ने पुलिस में उसके लापता होने की शिकायत दर्ज करवाई है। फिलहाल उसकी अनुपस्थिति और कथित वित्तीय अनियमितताओं के बीच संबंध को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पांच दिन पहले ऑडिट टीम ने खंगाला था वित्तीय रिकॉर्ड
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की ऑडिट टीम ने करीब पांच दिन पहले पट्टी सिविल अस्पताल के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की थी। इस दौरान करीब एक करोड़ रुपये की अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड की गहराई से पड़ताल शुरू की गई, जिसमें फर्जी आईडी और सरकारी खातों से कथित तौर पर राशि निकलवाने से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। इस मामले ने अस्पताल में वित्तीय निगरानी की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कई वर्षों से विभाग की ऑडिट टीमें समय-समय पर अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच करती रही हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी कथित वित्तीय अनियमितता का अब सामने आना जांच का अहम विषय बन गया है। अब यह भी पता लगाया जाएगा कि कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों से जुड़े रिकॉर्ड की निगरानी किस स्तर पर होती थी। साथ ही, क्या इस पूरे मामले में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भी भूमिका रही है, इसकी जांच भी की जाएगी। सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के दौरान पिछले वर्षों के लेन-देन और भुगतान संबंधी दस्तावेजों को भी खंगाला जा सकता है।
सिविल सर्जन बोले- प्रारंभिक जांच में सामने आई एक करोड़ की गड़बड़ी
सिविल सर्जन डॉ. संदीप धवन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ऑडिट टीम की प्रारंभिक जांच में पट्टी सिविल अस्पताल में करीब एक करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी मामले की विस्तृत जांच होनी बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही हेराफेरी की वास्तविक राशि और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। डॉ. धवन के अनुसार, विभाग के उच्च अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत करवा दिया गया है। अगली कानूनी कार्रवाई के लिए केस पुलिस को भेजा जा रहा है। इसके बाद पुलिस और संबंधित विभाग की जांच में वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल होगी।
पट्टी सिविल अस्पताल में सामने आए इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग के वित्तीय प्रबंधन और सरकारी फंड की निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब एक करोड़ रुपये की प्रारंभिक अनियमितताओं के सामने आने के बाद अब यह पता लगाना जरूरी होगा कि कथित तौर पर कितनी राशि सरकारी खातों से निकाली गई और यह पैसा किन मदों में दिखाया गया। जांच में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित फर्जी आईडी किस तरह तैयार की गईं और भुगतान की प्रक्रिया में किन स्तरों पर जांच हुई। फिलहाल मामला प्रारंभिक जांच के चरण में है। पुलिस को केस भेजे जाने के बाद आगे की कार्रवाई और विस्तृत जांच से ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ होगी।


