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Yamunanagar News: दड़वा में गोबर-धन संयंत्र पर ग्रामीणों ने उठाई आर-पार की आवाज, बोले- ‘पर्यावरण और सुरक्षा से खिलवाड़ मंजूर नहीं’

GGaganpreet Kaur
Yamunanagar News: दड़वा में गोबर-धन संयंत्र पर ग्रामीणों ने उठाई आर-पार की आवाज, बोले- 'पर्यावरण और सुरक्षा से खिलवाड़ मंजूर नहीं'

दड़वा में गोबर-धन संयंत्र पर ग्रामीणों ने उठाई आर-पार की आवाज

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Yamunanagar News: संजीव चौहान (यमुनानगर) यमुनानगर जिले के दड़वा गांव में प्रशासन द्वारा प्रस्तावित गोबर-धन (कंप्रेस्ड बायोगैस) संयंत्र को लेकर क्षेत्र के लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर उतरने को बेताब है। परियोजना के लिए चुनी गई जमीन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने गहरी आपत्ति जताई है। उपायुक्त कार्यालय में आयोजित होने वाली उच्चस्तरीय बैठक से पहले दड़वा और आसपास के गांवों के प्रतिनिधियों ने अपनी आपत्तियों का एक मजबूत पुलिंदा तैयार कर लिया है। ग्रामीणों का साफ शब्दों में कहना है कि यदि सरकार को बायोगैस संयंत्र स्थापित करना ही है, तो उसे घनी आबादी, नहर और धार्मिक स्थलों से दूर किसी अन्य वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।

संयंत्र के स्थान पर सवाल उठाते हुए ग्रामीण नरेश कांबोज ने बताया कि जिस जगह का चयन किया गया है, वह पश्चिमी यमुना नहर से केवल 10 मीटर की दूरी पर है। इतना ही नहीं, इसके बिल्कुल पास में श्मशान घाट और कब्रिस्तान भी स्थित हैं। ग्रामीणों को डर है कि यदि भविष्य में संयंत्र में किसी तरह की आगजनी, गैस रिसाव या अपशिष्ट पानी का रिसाव होता है, तो नहर का पानी प्रदूषित होने के साथ-साथ भयंकर हादसा हो सकता है।

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पहले से प्रदूषण से त्रस्त है इलाका, अब एक और नया संकट

दड़वा और आसपास के इलाकों की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि यह क्षेत्र पहले से ही थर्मल पावर प्लांट से उड़ने वाली राख, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की सड़ांध और स्थानीय डेयरियों के कचरे से नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। ऐसे में एक और कचरा आधारित संयंत्र यहां के निवासियों के स्वास्थ्य पर सीधा हमला होगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिस तकनीकी व वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर इस जमीन का चयन किया गया है, उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाए।

ग्रामीणों ने इस बात का भी उल्लेख किया कि प्रस्तावित भूमि बाढ़ संभावित क्षेत्र में आती है। इससे पहले मुकरामपुर में भी बाढ़ के खतरे को देखते हुए ही बायोगैस संयंत्र के स्थान में बदलाव किया गया था। इसके साथ ही पंजाब के घुंघराली राजपूताना गांव में बायोगैस प्लांट को लेकर हुए भारी जनविरोध का उदाहरण देते हुए ग्रामीणों ने मांग की कि किसी भी कदम को आगे बढ़ाने से पहले अन्य राज्यों के कड़वे अनुभवों और उनसे मिले सबक का अध्ययन किया जाना बेहद जरूरी है।

कचरे के स्रोत और प्रदूषण नियंत्रण पर जानकारी सार्वजनिक करने की मांग

ग्रामीणों ने संयंत्र में लाए जाने वाले कचरे की छंटाई (सेग्रिगेशन) प्रक्रिया को लेकर भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। यदि शहरों से मिक्स कचरा यहां लाया गया, तो उसमें अस्पतालों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला खतरनाक बायो-मेडिकल वेस्ट भी पहुंच सकता है। फतेहपुर, दड़वा माजरी, नया गांव और बहारामपुर जैसे कई आसपास के गांव, जो नगर निगम की सीमा से बाहर हैं, इस संयंत्र के प्रदूषण से सीधे प्रभावित होंगे।

क्षेत्र में प्रस्तावित 800 मेगावाट की नई थर्मल यूनिट का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि महज ‘जमीन उपलब्ध होने’ के आधार पर कोई भी नया प्रोजेक्ट ग्रामीणों पर न थोपा जाए। पहले पूरे यमुनानगर क्षेत्र की ‘कैरिंग कैपेसिटी’ (पर्यावरणीय सहन क्षमता) का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। इस विरोध प्रदर्शन और मांग पत्र तैयार करने के दौरान नरेश कंबोज, अरविंद सरपंच, कमल सरपंच, राज कुमार सरपंच, विक्रांत कंबोज, तारा चंद, छोटू राम पूर्व सरपंच, कुलदीप कंबोज, आशीष मित्तल, रणधीर पूर्व सरपंच और पंच संजीव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें– धान खरीद से पहले जागे किसान, भारतीय किसान संघ ने खोला मोर्चा, 15 सितंबर से खरीद और 20% नमी की उठाई मांग

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