Yamunanagar News: धान खरीद से पहले जागे किसान, भारतीय किसान संघ ने खोला मोर्चा, 15 सितंबर से खरीद और 20% नमी की उठाई मांग

धान खरीद से पहले जागे किसान, भारतीय किसान संघ ने खोला मोर्चा
Yamunanagar News: संजीव चौहान (यमुनानगर) खरीफ विपणन सीजन शुरू होने से ठीक पहले धान की सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर अन्नदाताओं की चिंताएं गहराने लगी हैं। हर साल खरीद प्रक्रिया के दौरान नमी, बारदाने की किल्लत, मंडियों में जाम और उठान में देरी से जूझने वाले किसानों ने इस बार सीजन शुरू होने से पहले ही सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में भारतीय किसान संघ ने यमुनानगर में मुख्यमंत्री के नाम जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा और खरीद व्यवस्था में समय रहते व्यापक सुधार करने की मांग की।
भारतीय किसान संघ के वरिष्ठ सदस्य पिंटू राणा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते प्रशासनिक इंतजाम दुरुस्त नहीं किए गए, तो इसका सीधा आर्थिक और मानसिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा। किसान संघ ने मांग की है कि प्रदेश की मंडियों में धान की सरकारी खरीद 15 सितंबर से ही औपचारिक रूप से शुरू कर दी जाए।
‘कंबाइन कटाई के कारण बढ़ती है नमी, 17% का नियम व्यावहारिक नहीं’
पिंटू राणा ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि राज्य में करीब 95 फीसदी धान की कटाई कंबाइन मशीनों के जरिए ही होती है। खेतों में मजदूरों की भारी किल्लत के चलते हाथ से कटाई कराना अब लगभग असंभव हो चुका है। कंबाइन से कटी फसल में स्वाभाविक रूप से नमी का स्तर थोड़ा अधिक रहता है।
वर्तमान नियमों के तहत 17 प्रतिशत से अधिक नमी होने पर खरीद एजेंसियां या तो धान लेने से इनकार कर देती हैं या फिर नमी के नाम पर किसानों की फसल में मनमानी कटौती की जाती है। पहले से ही खाद, बीज, डीजल और मजदूरी की बढ़ती लागत से परेशान किसानों पर यह कटौती अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालती है। किसान संघ का कहना है कि सरकार को व्यावहारिक रुख अपनाते हुए नमी की मानक सीमा को 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना चाहिए।
ठेकेदारों की ढिलाई से पटरी से उतरती है व्यवस्था, आढ़तियों को सौंपें उठान
मंडियों में फसल की आवक के दौरान बनने वाले जाम और अव्यवस्था पर चिंता जताते हुए किसान नेताओं ने उठान नीति में बदलाव की वकालत की। संघ का तर्क है कि मौजूदा समय में ट्रांसपोर्टरों और ठेकेदारों के जरिए धान का उठान कराया जाता है, जिनकी लापरवाही के कारण बोरियां कई-कई दिनों तक मंडियों में ही डंप पड़ी रहती हैं।
समय पर उठान न होने से मंडियों में नई फसल उतारने के लिए जगह नहीं बचती और सड़कों तक गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। यदि उठान की सीधी जिम्मेदारी मंडियों के आढ़तियों को दे दी जाए, तो स्थानीय स्तर पर तालमेल बेहतर होगा और बोरियों का उठान तेजी से हो सकेगा।
किसान संघ ने प्रशासन से सख्त लहजे में कहा कि खरीद का दिन तय होने से पहले ही सभी मंडियों में नमी मापने वाले यंत्र (माइस्चर मीटर), पर्याप्त बारदाना, पीने के पानी और तिरपाल जैसी मूलभूत सुविधाओं का पुख्ता प्रबंध कर लिया जाए ताकि किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचने पर मजबूर न होना पड़े।
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