Nilokheri News: बाल तस्करी पर नकेल कसने उतरी एम डी डी ऑफ इंडिया, करनाल में शुरू हुआ बड़ा अभियान
बाल तस्करी पर नकेल कसने उतरी एम डी डी ऑफ इंडिया
Nilokheri News: नीलोखेड़ी (महाबीर मैहला) हरियाणा के करनाल जिले में मासूमों के अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक संस्था ‘एम डी डी ऑफ इंडिया’ ने बड़ा कदम उठाया है। नीलोखेड़ी, निसिंग और आसपास के इलाकों में संस्था ने बाल तस्करी यानी चाइल्ड ट्रैफिकिंग के खिलाफ आर-पार का अभियान छेड़ने का निर्णय लिया है। विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के मौके पर नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “इंश्योरिंग ए चाइल्ड राइट्स, पोटेंशियल एंड प्रॉस्पेरिटी” में इस रणनीति पर मुहर लगाई गई।
इस सम्मेलन का आयोजन 782 जिलों के 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के नेटवर्क ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ (JRC) द्वारा किया गया। यहीं से ‘नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग’ की शुरुआत की गई, जो साल 2030 तक लगातार चलाया जाएगा। एम डी डी ऑफ इंडिया इस नेटवर्क की प्रमुख सहयोगी संस्था के रूप में जी-जान से जुट गई है।
देश में हर घंटे 11 बच्चे गायब, जानिए इस खौफनाक कारोबार का सच
सम्मेलन में आंकड़ों की मदद से स्थिति की भयावहता सामने रखी गई। एम डी डी ऑफ इंडिया के कार्यकारी अधिकारी सुरिंदर सिंह मान ने जानकारी दी कि देश में रोजाना औसतन 6 बच्चे तस्करी के शिकार बनते हैं और 5 मासूमों को जबरन मजदूरी के काम में झोंक दिया जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर घंटे 11 बच्चे गायब होते हैं और इनमें से कई बच्चे इसी संगठित अपराध का हिस्सा बन जाते हैं।
हथियारों और नशीले पदार्थों के कारोबार के बाद ह्यूमन ट्रैफिकिंग दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन चुका है। अपराधियों का मुख्य निशाना आर्थिक रूप से कमजोर परिवार और असहाय बच्चे होते हैं। ये गिरोह अच्छी जिंदगी और रोजगार का लालच देकर बच्चों को उठा ले जाते हैं और उन्हें बंधुआ मजदूरी, भीख मांगने और यौन शोषण के नरक में धकेल देते हैं।
प्रशासन के सहयोग से तीन मोर्चों पर होगा काम
करनाल जिले को पूरी तरह ट्रैफिकिंग मुक्त बनाने के लिए एम डी डी ऑफ इंडिया ने जमीन पर तीन-स्तरीय योजना लागू करने का फैसला किया है। सबसे पहले स्थानीय स्तर पर मंडराने वाले बिचौलियों और संदिग्धों की पहचान कर पुलिस के जरिए सख्त कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी।
दूसरा कदम जोखिम भरे परिवारों को सुरक्षा कवच देना होगा। हाशिये पर खड़े परिवारों को चिन्हित करके उनके बच्चों को सरकारी योजनाओं और शिक्षा से सीधे जोड़ा जाएगा ताकि गरीबी की वजह से कोई बच्चा इस दलदल में न फंसे। तीसरा प्रमुख कदम मुक्त कराए गए बच्चों के मानसिक और सामाजिक पुनर्वास का होगा, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।
केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर बोलीं- कार्यकर्ताओं का काम सराहनीय
उद्घाटन सत्र में पहुंचीं केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं के प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि किसी बेबस बच्चे की जान बचाना दुनिया का सबसे पुनीत कार्य है। छोटी उम्र की बच्चियां इस तंत्र में फंस जाती हैं और कई बार कभी घर नहीं लौट पातीं। ऐसे में इस दलदल से मासूमों को निकालने वाले संस्थाओं के कार्यकर्ता किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं।
बता दें कि ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ (JRC) नेटवर्क दुनिया का सबसे बड़ा कानूनी हस्तक्षेप कार्यक्रम चला रहा है। साझा प्रयासों का ही नतीजा है कि अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 के दौरान देशभर में 1,22,516 बच्चों को तस्करी के जाल से सुरक्षित बचाया जा चुका है।
यह भी पढ़ें– नीलोखेड़ी के सरकारी स्कूल में रोड़ समाज सद्भावना कमेटी की पहल, पौधारोपण के साथ बांटी लेखन सामग्री
