Yashveer Singh Javelin: भाला फेंक में भारत का डबल धमाका, हरियाणा के नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह ने रचा इतिहास
भाला फेंक में भारत का डबल धमाका, हरियाणा के नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह ने रचा इतिहास
Yashveer Singh Javelin: स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के लिए जैवलिन थ्रो स्पर्धा दोहरी खुशियां लेकर आई। प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला भले ही श्रीलंका के रुमेश पाथिरागे ने 89.75 मीटर का थ्रो कर अपने नाम किया हो, लेकिन असली सुर्खियां भारतीय खिलाड़ियों ने बटोरीं। भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने प्रतिकूल मौसम और तेज हवाओं के बीच 85.83 मीटर का थ्रो कर सिल्वर मेडल जीता, जबकि देश के युवा थ्रोअर यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के साथ ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया।
‘मुझे एशियन गेम्स की याद आ गई’ – यशवीर के मुकाम पर बोले नीरज
मुकाबले के बाद दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा के चेहरे पर हार की कोई शिकन नहीं थी। उन्होंने अपने सिल्वर मेडल से ज्यादा तवज्जो साथी खिलाड़ी यशवीर सिंह के प्रदर्शन को दी। नीरज ने कहा कि उन्हें हांगझोउ एशियन गेम्स की याद आ गई जब वे और किशोर जेना एक साथ पोडियम पर खड़े हुए थे। नीरज के मुताबिक, यशवीर ने दबाव के क्षणों में जिस तरह अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (PB) किया, वह इस बात का सबूत है कि भारतीय जैवलिन थ्रो का भविष्य बेहद मजबूत हाथों में है।
छठे प्रयास में रचा इतिहास: यशवीर ने विश्व चैंपियन और ओलंपिक विजेता को पीछे छोड़ा
कॉमनवेल्थ गेम्स में डेब्यू कर रहे हरियाणा के यशवीर सिंह का यह सफर बेहद रोमांचक रहा। पहले पांच प्रयासों तक वे करीब 81 मीटर के थ्रो के साथ पदक की रेस से बाहर चल रहे थे। लेकिन आखिरी और छठे प्रयास में उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और 85.41 मीटर दूर भाला फेंककर पोडियम पर तीसरा स्थान पक्का कर लिया। इस ऐतिहासिक थ्रो के साथ यशवीर ने न केवल अपना पिछला सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड (83.72 मीटर) ध्वस्त किया, बल्कि पूर्व विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स और मौजूदा ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम जैसे दिग्गजों को भी पीछे छोड़ दिया।
हरियाणा से निकला एक और ‘डायमंड’, नीरज के नक्शेकदम पर यशवीर
नीरज चोपड़ा के ही गृह राज्य हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले यशवीर सिंह पहली बार 2022 के इंडियन अंडर-20 फेडरेशन कप में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने नीरज का ही मीट रिकॉर्ड तोड़ा था। इसके बाद लगातार उतार-चढ़ाव भरे अंतरराष्ट्रीय दौर से गुजरने के बाद आखिरकार ग्लास्गो की धरती पर उनकी मेहनत रंग लाई। मुश्किल परिस्थितियों में नीरज के सीजन बेस्ट (85.83 मीटर) थ्रो और यशवीर के इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि विश्व एथलेटिक्स के पटल पर भारत का दबदबा आने वाले सालों में और बढ़ने वाला है।
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