Chandigarh News: सुखना लेक की कांसल डाइवर्जन कैनाल में मिट्टी कटाव, इंजीनियरिंग-इकोलॉजिकल स्टडी को मंजूरी

सुखना लेक की कांसल डाइवर्जन कैनाल में मिट्टी कटाव
Chandigarh News: चंडीगढ़ की सुखना लेक में पानी पहुंचाने वाली कांसल डाइवर्जन कैनाल की मजबूती को लेकर प्रशासन ने विस्तृत जांच शुरू करने की तैयारी कर ली है। करीब 3.4 किलोमीटर लंबी इस कैनाल के कई हिस्सों में मिट्टी कटाव की शिकायतों के बाद वेटलैंड अथॉरिटी ने इंजीनियरिंग और इकोलॉजिकल स्टडी को मंजूरी दी है।
कैनाल कैंबवाला एंट्री गेट से शुरू होकर नेपली की तरफ साकेतड़ी पुल तक जाती है। यह आसपास के कैचमेंट एरिया से आने वाले पानी को सुखना लेक तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती है, इसलिए इसके किनारों की मजबूती और पानी के सुरक्षित प्रवाह का सीधा संबंध लेक की जल व्यवस्था से है।
मिट्टी कटाव से किनारों की स्थिरता पर चिंता
कैनाल के कुछ हिस्सों में लगातार मिट्टी कटने की समस्या सामने आई है। अगर कटाव बढ़ता है तो किनारों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है और पानी के बहाव में भी परेशानी पैदा हो सकती है।
इसके अलावा कटाव के कारण मिट्टी और गाद के कैनाल के रास्ते सुखना लेक तक पहुंचने का खतरा भी बढ़ सकता है। इससे लेक के जल प्रवाह और उसके पर्यावरणीय संतुलन पर असर पड़ने की आशंका है।
नवंबर तक होगी इंजीनियरिंग स्टडी
वेटलैंड अथॉरिटी के निर्देश के बाद यूटी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की टीमें कैनाल का फील्ड असेसमेंट करेंगी। इस दौरान उन हिस्सों की पहचान की जाएगी, जहां मिट्टी का कटाव ज्यादा है और जहां तत्काल सुरक्षा उपायों की जरूरत है।
अधिकारियों के मुताबिक, इंजीनियरिंग असेसमेंट पूरा करने की डेडलाइन नवंबर 2026 तय की गई है। स्टडी में कैनाल की मौजूदा स्थिति के साथ उन जगहों का भी आकलन किया जाएगा, जहां भविष्य में कटाव बढ़ने की संभावना है।
ग्रेडिंग और रिवेटमेंट समेत होंगे संरक्षण कार्य
असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर कैनाल को मजबूत करने के लिए अलग–अलग तकनीकी उपाय किए जाएंगे। जरूरत के अनुसार ग्रेडिंग, रिवेटमेंट, प्रोटेक्टिव स्ट्रक्चर और सॉयल एंड मॉइश्चर कंजर्वेशन से जुड़े काम किए जा सकते हैं।
संवेदनशील हिस्सों को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से मजबूत करने की योजना है। इसका मकसद केवल कैनाल के ढांचे को सुरक्षित करना नहीं, बल्कि पानी के प्रवाह को भी लगातार बनाए रखना है।
दो साल में चरणबद्ध तरीके से पूरा होगा काम
इंजीनियरिंग और इकोलॉजिकल स्टडी के बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर कैनाल के स्टेबलाइजेशन और कंजर्वेशन का काम अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना है। इससे उन हिस्सों पर समय रहते काम किया जा सकेगा, जहां कटाव सबसे ज्यादा पाया जाता है।
कांसल डाइवर्जन कैनाल का संरक्षण सुखना लेक के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि यह कैचमेंट एरिया का पानी लेक तक पहुंचाती है। कैनाल के किनारों को स्थिर रखने से मिट्टी और गाद के लेक में जाने को कम करने में मदद मिलेगी और पानी के प्रवाह को सुरक्षित रखने में भी सहायता मिलेगी।
सुखना लेक के इकोलॉजिकल बैलेंस से जुड़ा मामला
सुखना लेक की जल व्यवस्था केवल लेक के भीतर जमा पानी तक सीमित नहीं है। आसपास के कैचमेंट एरिया से आने वाला पानी भी इसके जल प्रवाह का हिस्सा है और कांसल डाइवर्जन कैनाल इस व्यवस्था में अहम कड़ी है।
इसलिए कैनाल की इंजीनियरिंग स्थिति के साथ उसका इकोलॉजिकल असर भी स्टडी में देखा जाएगा। प्रशासन की योजना है कि तकनीकी सुधार के साथ मिट्टी कटाव को नियंत्रित किया जाए, ताकि लंबे समय तक कैनाल और सुखना लेक दोनों की जल व्यवस्था सुरक्षित रहे।
