Narwana News: नरवाना में आवारा कुत्ते का तांडव, एक ही दिन में 6 लोगों को काटकर किया लहूलुहान

नरवाना में आवारा कुत्ते का तांडव, एक ही दिन में 6 लोगों को काटकर किया लहूलुहान
Narwana News: जींद जिले के नरवाना शहर में आवारा कुत्तों का खौफ अब केवल परेशानी नहीं, बल्कि शहरवासियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। मंगलवार का दिन शहर के पंजाबी चौक इलाके के लिए बेहद खौफनाक रहा, जहां एक ही दिन के भीतर पागल कुत्ते ने 6 लोगों को अपना शिकार बना लिया। घायलों में गोपाल, प्रीति, बलबीर सैनी, कमलेश, नीलम मुंजाल और नरेंद्र मुंजाल की पत्नी शामिल हैं। अचानक हुए इस हमले से इलाके में भगदड़ मच गई और परिजन गंभीर रूप से घायल नरेंद्र मुंजाल की पत्नी को तुरंत नरवाना के नागरिक अस्पताल लेकर भागे।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: नरवाना अस्पताल से जींद किया गया रेफर
कुत्ते के काटने के बाद जब पीड़ित नागरिक अस्पताल पहुंचे, तो वहां की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था ने मरीजों और उनके परिजनों के दर्द को और बढ़ा दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन और पर्याप्त इलाज की सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर जींद रेफर कर दिया गया। स्थानीय निवासी निशा रानी और अंजली का कहना है कि एक तरफ शहर की सड़कों पर कुत्तों का खौफ है, तो दूसरी तरफ अस्पताल में इलाज के नाम पर सिर्फ चक्कर कटवाए जा रहे हैं।
शहर की गलियों में दहशत, घरों में कैद रहने को मजबूर बच्चे व बुजुर्ग
पंजाबी चौक के अलावा बीरबल नगर, पतराम नगर, मॉडल टाउन और हरि मंदिर के पास भी आवारा कुत्तों के बड़े-बड़े झुंड घूमते नजर आ रहे हैं। कुत्ते इतने आक्रामक हो चुके हैं कि अकेले निकलने वाले बुजुर्गों और छोटे बच्चों पर सीधे हमला कर रहे हैं। डर के मारे बच्चों का बाहर खेलना पूरी तरह बंद हो गया है और राहगीर लंबा रास्ता बदलकर जाने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी ऋषि मुंजाल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पंजाबी चौक इलाके में दो-दो वार्ड पार्षद होने के बावजूद इस गंभीर समस्या की लगातार अनदेखी की जा रही है।
प्रशासन की नाकामी से फूटा लोगों का गुस्सा
एक ही दिन में आधा दर्जन लोगों के लहूलुहान होने के बाद नरवाना के लोगों का धैर्य जवाब दे गया है। मोहल्लावासियों ने नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई नसबंदी या धरपकड़ अभियान नहीं चलाया गया। उग्र हुए लोगों ने साफ शब्दों में सवाल उठाया है कि क्या जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे या किसी मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहा है? शहरवासियों ने नगर परिषद से तुरंत विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों से मुक्ति दिलाने की गुहार लगाई है।
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