National Anthem: ‘जन गण मन’ हटाओ, ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाओ, मुकेश खन्ना ने पीएम मोदी से उठाई मांग

'जन गण मन' हटाओ, 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान बनाओ
National Anthem: मुंबई। अपने बेबाक बयानों और तीखी टिप्पणियों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले वरिष्ठ अभिनेता मुकेश खन्ना ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। ‘शक्तिमान’ फेम अभिनेता ने देश के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को बदलने की मांग उठाते हुए कहा है कि इसकी जगह ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान का दर्जा दिया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है।
‘महारानी की तारीफ में लिखा गया था जन गण मन’ – मुकेश खन्ना
समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) से खास बातचीत में मुकेश खन्ना ने राष्ट्रगान के इतिहास को लेकर कई विवादित दावे किए। उन्होंने कहा कि ‘जन गण मन’ मूल रूप से भारत माता की स्तुति नहीं, बल्कि ब्रिटिश हुकूमत के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए लिखा गया था।
खन्ना ने दावा करते हुए कहा, “मैंने तीन साल पहले भी यह बात उठाई थी कि ‘वंदे मातरम’ ही हमारा असली राष्ट्रगान होना चाहिए। ‘जन गण मन’ हमारे देश का वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं करता। यह ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ के स्वागत में और उनकी तारीफ में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखा गया गीत था, जिसे स्वतंत्रता के बाद स्वीकार कर लिया गया। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे ‘अधिनायक’ और ‘भारत भाग्य विधाता’ ब्रिटिश हुक्मरानों के लिए थे, न कि हमारी मातृभूमि के लिए।”
पीएम मोदी से राष्ट्रगान बदलने की अपील
मुकेश खन्ना ने इस मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ में ही सच्चा देशभक्ति का भाव निहित है। लता मंगेशकर द्वारा गाए गए इसके संस्करण का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद भी 7 मिनट का एक भव्य ‘वंदे मातरम’ गीत रिकॉर्ड किया है, जिसे जल्द ही जारी किया जाएगा।
अभिनेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाते हुए कहा, “मोदी जी को इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाना चाहिए। देशभर के सभी स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कार्यक्रमों में पूरे ‘वंदे मातरम’ के गायन को अनिवार्य किया जाना चाहिए। अतीत में इसके कुछ हिस्सों को हटा दिया गया था, लेकिन अब समय आ गया है कि इसे इसका असली और पूर्ण सम्मान मिले।”
विवादों से पुराना नाता
यह पहला मौका नहीं है जब मुकेश खन्ना ने किसी संवेदनशील मुद्दे पर बयान देकर बहस छेड़ी हो। इससे पहले भी वे बॉलीवुड, सेंसर बोर्ड और राजनीतिक विषयों पर अपने कड़े रुख के लिए जाने जाते रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रगान को बदलने संबंधी उनके इस ताजा बयान पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं—जहां उनके समर्थक इसे राष्ट्रवाद से जोड़ रहे हैं, वहीं आलोचक इसे ध्यान खींचने का एक नया जरिया बता रहे हैं।
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