Gurugram News: साइबर सिटी में AI गानों का हमला, “250 करोड़ के फ्लैट, बाहर तैर रही नाव”, जलमग्न गुरुग्राम का वायरल सॉन्ग्स

साइबर सिटी में AI गानों का हमला, "250 करोड़ के फ्लैट, बाहर तैर रही नाव", जलमग्न गुरुग्राम का वायरल सॉन्ग्स
Gurugram News: कहने को तो गुरुग्राम देश की मिलेनियम सिटी और आईटी हब है, लेकिन मानसून की एक बारिश इसे वेनिस की तर्ज पर ‘नावों वाला शहर’ बना देती है। इस बार जलभराव और चरमराती ड्रेनेज व्यवस्था से परेशान गुरुग्राम के लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाने के बजाय एक नया और अनोखा रास्ता चुना है।
शहरवासी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल करके तीखे और मजाकिया गाने तैयार कर रहे हैं, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन एआई गानों के जरिए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) और नगर निगम की कार्यप्रणाली का जमकर मखौल उड़ाया जा रहा है।
“250 करोड़ के फ्लैट और नाव की जरूरत”—लग्जरी रियल एस्टेट पर कसे जा रहे तंज
“गुड़गांव तू तो डूब गया है, ओला-उबर भी रूठ गया है” और “250 करोड़ के फ्लैट बिके जहां, बारिश आई तो नाव चाहिए वहां”—जैसे बोल इन दिनों हर किसी की टाइमलाइन पर तैर रहे हैं।
गानों के बैकग्राउंड में पानी में बहती महंगी कारें, लबालब भरी सड़कें और घुटनों तक पानी में दफ्तर जाने को मजबूर आईटी कर्मचारी दिखाई दे रहे हैं। दरअसल, हाल के दिनों में गुरुग्राम के पॉश इलाकों में करोड़ों रुपये के विला और फ्लैट्स की बिक्री की खबरें आई थीं। अब लोग चुटकी ले रहे हैं कि बिल्डरों को इतने महंगे अपार्टमेंट्स के साथ एक-एक लाइफ जैकेट और बोट भी मुफ्त देनी चाहिए।
सड़कों पर रेंगती जिंदगी, ओला-उबर ने भी मोड़ा मुंह
शहर में जलभराव का असर रोजाना आने-जाने वाले नौकरीपेशा लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। सोहना रोड, सुभाष चौक, राजीव चौक और बजघेड़ा अंडरपास जैसे मुख्य हॉटस्पॉट्स पर कई-कई फीट पानी भर गया है। हालत यह है कि गहरे सिंकहोल्स और पानी में गाड़ियां बंद होने के डर से कैब और ऑटो चालकों ने जलमग्न इलाकों में जाने से साफ मना कर दिया है। लोग घंटों मोबाइल ऐप पर राइड ढूंढते रह जाते हैं, लेकिन कोई ड्राइवर बुकिंग स्वीकार नहीं कर रहा।
जिम्मेदारी जीएमडीए और एनएचएआई की, सोशल मीडिया के टारगेट पर नगर निगम
इफ्को चौक के पास दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48) पर सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया। हालांकि यह इलाका भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और जीएमडीए के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन सोशल मीडिया ट्रोलर्स के निशाने पर सबसे ज्यादा नगर निगम (MCG) ही है। भले ही निगम का दावा हो कि अंदरूनी कॉलोनियों से पानी की निकासी जल्द करवा दी गई है, लेकिन मुख्य हाइवे और जीएमडीए के अंडरपासों में भरा पानी पूरे शहर की साख पर बट्टा लगा रहा है।
कब तक पल्ला झाड़ेगा प्रशासन?
हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और ड्रेनेज दुरुस्त करने के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट कागजों में बहा दिया जाता है। लेकिन जैसे ही पहली मूसलाधार बारिश होती है, सारे दावे बह जाते हैं। अब जनता का गुस्सा एआई गानों, मीम्स और डिजिटल ट्रोलिंग के रूप में बाहर निकल रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि हर साल टैक्स देने के बावजूद उन्हें नारकीय जीवन क्यों जीना पड़ता है और सरकार कब तक पुरानी सरकारों पर दोष मढ़कर पल्ला झाड़ती रहेगी।
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