Barnala News: बरनाला पुलिस की थ्योरी पर हाईकोर्ट सख्त, NDPS मामले में आरोपी को मिली जमानत, जांच अधिकारी पर बैठाई जांच

बरनाला पुलिस की थ्योरी पर हाईकोर्ट सख्त, NDPS मामले में आरोपी को मिली जमानत, जांच अधिकारी पर बैठाई जांच
Barnala News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक मामले में बरनाला सिटी पुलिस की ढीली जांच और संदिग्ध थ्योरी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। हेरोइन बरामदगी के मामले में 25 वर्षीय आरोपी को नियमित जमानत देते हुए अदालत ने बरनाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को संबंधित जांच अधिकारी के आचरण की निष्पक्ष जांच कराने का स्पष्ट निर्देश दिया है। जस्टिस संजय वशिष्ठ की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस की उस कहानी पर गंभीर सवाल उठाए, जिसमें गुप्त सूचना के बावजूद आरोपी मौके से गायब मिला और बाद में अदालत परिसर से पकड़ा गया।
यह पूरा मामला बरनाला शहर थाने में 11 दिसंबर 2025 को दर्ज एनडीपीएस कानून की धाराओं से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, उस रात एक गुप्त सूचना मिली थी कि तीन व्यक्ति सफेद रंग की एसयूवी कार में भारी मात्रा में हेरोइन लेकर बेचने जा रहे हैं। पुलिस ने नाकेबंदी की, लेकिन जब कार को रोका गया तो उसमें तीन के बजाय केवल दो ही व्यक्ति सवार मिले।
नाके पर नहीं मिला आरोपी, पुलिस की थ्योरी पर उठे सवाल
अदालत में याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि नाकाबंदी के दौरान कार की तलाशी लेने पर ड्राइवर सीट के नीचे से 1.39 किलोग्राम हेरोइन बरामद करने का दावा किया गया और मौके पर मौजूद दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
हैरान करने वाला मोड़ तब आया जब अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि गिरफ्तार आरोपियों को जब अदालत में पेश किया जा रहा था, तभी एक व्यक्ति घबराया हुआ वहां पहुंचा। गिरफ्तार आरोपियों में से एक ने उसकी पहचान तीसरे साथी के रूप में की, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। आरोपी के वकील ने कोर्ट में साफ किया कि गिरफ्तारी के समय न तो उसके पास से कोई नशीला पदार्थ बरामद हुआ और न ही बाद की रिमांड जांच में कोई रिकवरी हुई।
आठ महीने से जेल में था आरोपी, राज्य पक्ष नहीं दे पाया संतोषजनक जवाब
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का वकील इन तथ्यात्मक पहलुओं का खंडन नहीं कर सका, हालांकि उसने जमानत याचिका का विरोध जरूर किया। कस्टडी सर्टिफिकेट के मुताबिक याचिकाकर्ता 15 अगस्त तक लगभग आठ महीने और तीन दिन की जेल काट चुका था।
हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने गिरफ्तारी को लेकर जो मनगढ़ंत कहानी पेश की है, उसे मुकदमे के दौरान साक्ष्यों की कसौटी पर परखा जाना अभी बाकी है। किसी भी व्यक्ति को केवल पुलिस की संदेहास्पद थ्योरी के आधार पर अनिश्चितकाल के लिए जेल में बंद नहीं रखा जा सकता।
एसएसपी को 4 सप्ताह में कार्रवाई के निर्देश, 25 सितंबर को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी को संबंधित ट्रायल कोर्ट की शर्तों के अनुसार ज़मानती मुचलका भरने पर रिहा करने का हुक्म सुनाया। इसके साथ ही, अदालत ने मामले में पुलिसिया लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए बरनाला एसएसपी को जांच अधिकारी की भूमिका और निष्पक्षता की जांच कराने का आदेश जारी किया।
अदालत ने एसएसपी को चार सप्ताह के भीतर पूरी जांच प्रक्रिया निपटाकर जरूरी दंडात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट अब 25 सितंबर को इस मामले पर अगली सुनवाई करेगा, जिसमें जांच अधिकारी के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा देखा जाएगा।
