Haryana Weather Update: हरियाणा में मानसून धीमा, अंबाला-करनाल में 51% कम बरसे बादल, भिवानी में 117% ज्यादा बारिश, जानें वजह

हरियाणा में मानसून धीमा, अंबाला-करनाल में 51% कम बरसे बादल, भिवानी में 117% ज्यादा बारिश, जानें वजह
Haryana Weather Update: भाद्रपद के महीने में बादलों की बेरुखी ने पूरे हरियाणा को पसीने से तर-बतर कर दिया है। हवा में नमी और आसमान से बरसती तीखी धूप के कारण हिसार, सिरसा, नूंह और भिवानी समेत अधिकांश जिलों में दिन का तापमान सामान्य से काफी ऊपर चला गया है। बुधवार को हिसार 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ राज्य का सबसे गर्म इलाका दर्ज किया गया। खेतों में खड़ी फसलों को जहां इस समय पानी की सख्त दरकार है, वहीं आसमान में छिटपुट बादलों की आवाजाही के सिवा कुछ हासिल नहीं हो रहा।
मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, गुरुवार को भी प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम साफ और शुष्क बना रहेगा। केवल उत्तर हरियाणा के तीन जिलों—पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर के चुनिंदा इलाकों में हल्की से मध्यम बूंदाबांदी हो सकती है। रोहतक, जींद, सिरसा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और महेंद्रगढ़ की बेल्ट में धूप के तीखे तेवर बरकार रहने की संभावना है।
क्यों थमी मानसूनी बारिश? मौसम वैज्ञानिकों ने बताई वजह
चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि मानसूनी हवाओं का मुख्य तंत्र यानी ‘मानसून ट्रफ’ की अक्षय रेखा इस समय जम्मू, देहरादून, शाहजहांपुर और वाराणसी से होकर बंगाल की खाड़ी की ओर गुजर रही है।
अब इसके धीरे-धीरे उत्तर में हिमालय की पहाड़ियों (तलहटियों) की ओर खिसकने के संकेत मिल रहे हैं। हवा का यह दबाव क्षेत्र जैसे ही उत्तर की तरफ शिफ्ट होगा, मैदानी इलाकों में मानसूनी हवाएं निष्प्रभावी हो जाएंगी। यही वजह है कि राज्य में अगले 4 से 5 दिनों तक झमाझम बारिश के आसार न के बराबर हैं।
आंकड़ों का खेल: अगस्त में सामान्य से ज्यादा बरसे बादल, फिर भी 7 जिले ‘रेड जोन’ में
अगर 1 जून से 26 अगस्त तक के मानसूनी सीजन की बात करें, तो हरियाणा में अब तक औसतन 257.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य आंकड़े (299.9 मिमी) से करीब 14 फीसदी कम है। हालांकि, अकेले अगस्त महीने के आंकड़े राहत देने वाले रहे हैं। इस महीने में अब तक 109.9 मिमी पानी बरसा है, जो अगस्त के सामान्य औसत (96.1 मिमी) से 14 प्रतिशत अधिक है।
लेकिन इस बारिश का वितरण बेहद असंतुलित रहा है। बारिश का असमान पैटर्न ही राज्य के किसानों के लिए चिंता का सबब बन गया है।
धान बेल्ट में सूखे जैसे हालात, भिवानी में रिकॉर्ड तोड़ बारिश
सबसे डराने वाली तस्वीर राज्य के धान उत्पादक जिलों से सामने आ रही है। कम बारिश के चलते 7 जिले सीधे ‘रेड जोन’ में आ गए हैं। आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि करनाल और अंबाला जैसे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में मानसून सीजन के दौरान 51-51 फीसदी तक कम बारिश हुई है। कैथल में 49%, सिरसा में 47%, पंचकूला में 44%, रोहतक में 36% और जींद में 27 से 52% तक बारिश की गिरावट दर्ज की गई है।
दूसरी ओर, दक्षिण-पश्चिमी हरियाणा के जिलों पर बादल मेहरबान दिखे हैं। भिवानी में सामान्य से 117 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि फतेहाबाद में 50%, कुरुक्षेत्र में 19%, पलवल में 17%, चरखी दादरी में 11% और रेवाड़ी में 3% ज्यादा पानी बरसा है। धान के खेतों में पानी के अभाव से किसान अब पूरी तरह ट्यूबवेल और सिंचाई की नहरों पर निर्भर हो गए हैं।
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