Haryana Doctor Shortage: हरियाणा स्वास्थ्य सेवा बदहाल, महेंद्रगढ़ में 100% पैरामेडिकल स्टाफ गायब! रोहतक में भी 341 पद खाली

हरियाणा स्वास्थ्य सेवा बदहाल, महेंद्रगढ़ में 100% पैरामेडिकल स्टाफ गायब! रोहतक में भी 341 पद खाली
Haryana Doctor Shortage: हरियाणा की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था इस समय मानव संसाधन के भयानक सूखे से जूझ रही है। प्रदेश के जिन सरकारी मेडिकल कॉलेजों के भरोसे लाखों गरीब मरीज इलाज की उम्मीद बांधते हैं, वे खुद ही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से वेंटिलेटर पर नजर आ रहे हैं। जून 2026 तक राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में कुल 5,314 पद रिक्त पड़े हैं। इनमें 2,572 पद डॉक्टरों (फैकल्टी) के हैं और 2,742 पद पैरामेडिकल स्टाफ के खाली पड़े हैं।
यह चौंकाने वाली और डरावनी तस्वीर विधानसभा के मानसूनी सत्र में सामने आई। नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने अप्रैल 2024 से जून 2026 तक प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़े पदों का ब्योरा मांगा था। इसके जवाब में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री आरती सिंह राव द्वारा पेश किए गए सरकारी आंकड़ों ने प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
जींद और महेंद्रगढ़ में हालात सबसे गंभीर, न के बराबर है स्टाफ
अगर जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो नए बने मेडिकल कॉलेजों की स्थिति बेहद भयावह है। जींद के सरकारी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के 559 स्वीकृत पदों में से महज 4 पर तैनाती है और 555 पद खाली पड़े हैं। हद तो यह है कि वहां पैरामेडिकल स्टाफ के 623 पदों में से 617 पद खाली हैं।
महेंद्रगढ़ मेडिकल कॉलेज की कहानी भी अलग नहीं है। वहां डॉक्टरों के 559 में से 492 पद खाली हैं, जबकि पैरामेडिकल स्टाफ के तो 100 फीसदी यानी सभी 744 पद खाली पड़े हैं। भिवानी में भी डॉक्टरों के 552 में से 477 पद और पैरामेडिकल स्टाफ के सभी 325 पद खाली हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि भव्य इमारतों का ढांचा खड़ा कर देने भर से मरीजों का इलाज कैसे संभव होगा?
जीटी रोड बेल्ट और मेवात का भी बुरा हाल
प्रदेश के अन्य प्रमुख जिलों के मेडिकल कॉलेजों में भी स्टाफ की भारी किल्लत है। करनाल मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के 200 और पैरामेडिकल के 181 पद खाली हैं। सोनीपत में डॉक्टरों के 213 और पैरामेडिकल के 132 पद रिक्त हैं। फरीदाबाद में डॉक्टरों के 97 तथा पैरामेडिकल के 242 पद खाली चल रहे हैं।
वहीं, नूंह के शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज (नल्हड़) में चिकित्सकों के 197 और पैरामेडिकल स्टाफ के 104 पद रिक्त हैं। नल्हड़ में रेडियोलॉजिस्ट की भारी कमी के कारण मरीजों को सीटी स्कैन और एमआरआई के लिए पीपीपी (PPP) मॉडल का सहारा लेना पड़ रहा है।
पीजीआईएमईआर रोहतक में भी सैकड़ों पद खाली
प्रदेश के सबसे बड़े और प्रीमियम मेडिकल संस्थान पंडित बी.डी. शर्मा पीजीआईएमएस, रोहतक की स्थिति भी बहुत संतोषजनक नहीं कही जा सकती। शोध और सुपर-स्पेशियलिटी के इस केंद्र में डॉक्टरों के स्वीकृत 852 पदों में से 341 पद खाली हैं। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ के 1,967 पदों में से 397 पद रिक्त हैं। हालांकि अन्य नए मेडिकल कॉलेजों की तुलना में रोहतक में सेवाएं चल रही हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर रिक्तियां संस्थान पर भारी दबाव बना रही हैं।
वेतन बढ़ाने की तैयारी में सरकार, HSSC को भेजी गई मांग
विधानसभा में सरकार ने अपनी सफाई में कहा कि ग्रुप-सी के पैरामेडिकल पदों को भरने के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) को इसी साल जनवरी में मांगपत्र (रिक्विजिशिन) भेजा जा चुका है।
इसके अलावा, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और ऑन्कोलॉजी जैसे सुपर-स्पेशियलिटी विभागों में डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए सरकार उनके वेतनमान (Salary Structure) में बढ़ोतरी करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। ताकि निजी अस्पतालों की ओर भाग रहे विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी क्षेत्र में रोका जा सके। फिलहाल, 5,314 खाली पदों का यह विशाल आंकड़ा हरियाणा के आम नागरिक के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की दास्तान बयां कर रहा है।
