Punjab BC Certificate Rules Change : पंजाब में BC सर्टिफिकेट के नियम बदले, 8 लाख से अधिक आय पर नहीं बनेगा प्रमाणपत्र

सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मामलों की कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर
Punjab BC Certificate Rules Change : पंजाब में BC सर्टिफिकेट के नियम बदले, 8 लाख से अधिक आय पर नहीं बनेगा प्रमाणपत्र पंजाब भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मामलों की कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र, छात्रवृत्ति और कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए नए दिशा-निर्देशों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर प्रमाणपत्र बनवाने में आ रही जटिलताओं को दूर करने के लिए सभी जिला अधिकारियों, सेवा केंद्रों और पटवारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जल्द ही राज्य भर के सेवा केंद्रों के बाहर सूचना पट्ट लगाए जाएंगे, जिससे आम जनता को पात्रता और नियमों की सटीक जानकारी मिल सके।
आय के साथ संपत्ति और पद से तय होगा ‘क्रीमी लेयर’, 8 लाख से अधिक आय वाले बाहर
डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया कि अब पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र केवल परिवार की बताई गई वार्षिक आय के आधार पर जारी नहीं होगा। इसके लिए आवेदक के माता-पिता की सामाजिक स्थिति, सरकारी पद, पिछले तीन वर्षों का आयकर रिटर्न और ग्रामीण व शहरी संपत्तियों की सघन जांच की जाएगी।
जिन परिवारों की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें क्रीमी लेयर श्रेणी में माना जाएगा और उन्हें इस प्रमाणपत्र का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा, संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों, उच्च प्रशासनिक अधिकारियों, डॉक्टरों और इंजीनियरों जैसे बड़े पेशेवरों के बच्चों की पात्रता का निर्धारण भी इन कड़े मानकों के आधार पर ही होगा।
विवाह के बाद भी माता-पिता की स्थिति रहेगी आधार, दूर की गईं भ्रांतियां
प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए मंत्री ने एक अहम व्यवस्था स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि किसी महिला के विवाह के बाद भी उसका BC प्रमाणपत्र ससुराल पक्ष की स्थिति से नहीं, बल्कि उसके माता-पिता की सामाजिक और आर्थिक स्थिति के आधार पर ही बनेगा।
उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि माता-पिता का प्रमाणपत्र पहले से नहीं बना है, तब भी बच्चे की अपनी पात्रता सिद्ध होने पर प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है। हालांकि, केवल किसी अन्य रिश्तेदार के प्रमाणपत्र को पात्रता का आधार नहीं माना जाएगा।
391 करोड़ की सहायता, छात्रवृत्ति की आय सीमा बढ़ाने की मांग
राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं का ब्योरा देते हुए डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वर्ष 2022 के बाद से अब तक ‘आशीर्वाद योजना’ के तहत लगभग 76 हजार लाभार्थियों को 391 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। पिछड़े वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए बी-श्रेणी के तहत प्रत्येक पात्र छात्र को 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर उत्तर-मैट्रिक (Post-Matric) छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा को मौजूदा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति वर्ष करने की सिफारिश की है।
स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण और छात्रवृत्ति का लाभ
कैबिनेट मंत्री ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि राज्य के करीब 6 हजार स्कूलों में पढ़ने वाले 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों को सालाना 75 हजार रुपये तथा 11वीं व 12वीं के विद्यार्थियों को 1.25 लाख रुपये तक की छात्रवृत्ति देने का प्रावधान किया गया है। पंजाबी विश्वविद्यालय में पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए जल्द ही दो नए छात्रावास शुरू किए जाएंगे।
इसके अलावा, राज्य के 12 प्रमुख व्यावसायिक कॉलेजों में BC प्रमाणपत्र धारकों के लिए 210 सीटें आरक्षित की गई हैं। वर्तमान में पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को राज्य की सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत और शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले के लिए 12 प्रतिशत आरक्षण की सुविधा मिल रही है।
