नारनौल के प्रसिद्ध कड़ियाँ वाले बालाजी धाम में 4 सितंबर को धूमधाम से मनाया जाएगा श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व, भगवान श्री कृष्ण का मध्य रात्रि होगा भव्य अभिषेक

Narnaul News: नारनौल के ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध कड़ियाँ वाले बालाजी धाम में इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर (शुक्रवार) को श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाएगा। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र एवं निशीथ काल (मध्य रात्रि) में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से संपन्न होगा।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित नरेंद्र आचार्य ने बताया कि कड़ियाँ वाले बालाजी मंदिर में वर्षों से चली आ रही विशेष धार्मिक परंपराओं के अनुसार आयोजन किया जाएगा। इस बार स्मार्त और वैष्णव दोनों परंपराओं के अनुसार जन्माष्टमी एक ही दिन मनाई जा रही है।
मध्य रात्रि 11:30 बजे से होगा पंचामृत अभिषेक
मंदिर के पुजारी पंडित नरेंद्र आचार्य के अनुसार, रात्रि लगभग 11:30 बजे बाल गोपाल का दूध, दही, शहद, घी, खांड, केसर, गुलाब जल, चंदन और गंगाजल से भव्य पंचामृत अभिषेक प्रारंभ होगा, जो रात्रि 12 बजे तक चलेगा। इस दौरान सेंट्रल संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के विद्वानों द्वारा गोपाल सहस्रनाम पाठ एवं पुरुष सूक्त के वैदिक मंत्रों का सस्वर गायन किया जाएगा।
रात्रि 12 बजे अभिषेक पूर्ण होने के बाद बाल रूप की मंगल आरती की जाएगी और श्रद्धालुओं में पंचामृत का प्रसाद वितरित होगा, जिसे ग्रहण कर भक्त अपना उपवास खोलेंगे।
जलझूलनी एकादशी तक मंदिर प्रांगण में झूलेंगे बाल गोपाल
पुजारी पंडित नरेंद्र आचार्य ने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर प्रांगण में बाल गोपाल को श्रद्धालुओं द्वारा झूला झुलाया जाएगा। जलझूलनी एकादशी तक बाल गोपाल की पूजा-अर्चना मंदिर के बाहर ही की जाएगी और एकादशी पर विशेष हवन-पूजन के बाद उन्हें पुनः गर्भगृह में विराजमान कराया जाएगा।
पंजीरी के प्रसाद का वैज्ञानिक महत्व
मौसम में परिवर्तन और शरद ऋतु के आगमन को देखते हुए भगवान को सोंठ, धनिया, अजवाइन, गोंद और काली मिर्च से तैयार विशेष पंजीरी का भोग लगाया जाएगा। पंडित नरेंद्र आचार्य ने बताया कि यह प्रसाद धार्मिक दृष्टिकोण के साथ-साथ स्वास्थ्य और पोषण की दृष्टि से भी बेहद लाभदायक है। पंडित नरेंद्र आचार्य एवं मंदिर समिति की ओर से समस्त नारनौलवासियों और मानव जाति के सुख, समृद्धि, निरोगी जीवन एवं दीर्घायु की मंगलकामना की।
