Bihar Flood Update: पटना में खतरे के निशान से 2 फीट ऊपर बह रही गंगा, काशी में परिवारों ने छोड़े घर, 13 जिले बाढ़ की चपेट में

पटना में खतरे के निशान से 2 फीट ऊपर बह रही गंगा
Bihar Flood Update: बिहार, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश के बाद बाढ़ और लैंडस्लाइड का असर बढ़ गया है। बिहार की राजधानी पटना में गंगा खतरे के निशान से करीब 2 फीट ऊपर बह रही है और राज्य के 13 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। उधर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में वरुणा नदी के किनारे रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, जबकि हिमाचल प्रदेश में बुधवार रात हुई तेज बारिश के बाद लैंडस्लाइड ने सड़क संपर्क प्रभावित कर दिया है।
बिहार में बीते दो दिनों से कई जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। इस दौरान राज्य की 8 नदियों का जलस्तर बढ़ा है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। ऐसे हालात में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आवाजाही, घरों की सुरक्षा और जरूरी सामान की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन सकती है।
पटना में गंगा खतरे के निशान से 2 फीट ऊपर
पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 2 फीट ऊपर पहुंच गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर ने गंगा किनारे बसे इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश और नदियों में बढ़ते पानी के कारण प्रशासन को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए रखनी पड़ रही है।
बिहार के 13 जिले फिलहाल बाढ़ की चपेट में हैं। 8 नदियों का जलस्तर बढ़ने से आने वाले समय में स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। बाढ़ का सीधा असर ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क, खेती और रोजमर्रा की आवाजाही पर पड़ सकता है।
काशी में 407 परिवारों ने छोड़ा घर
उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। वाराणसी यानी काशी में वरुणा नदी के किनारे रहने वाले 407 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। अब तक 2,910 लोग विस्थापित हो चुके हैं।
राहत और बचाव अभियान के लिए प्रशासन ने 36 नावें लगाई हैं। वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है और नदी चेतावनी स्तर पार कर चुकी है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ रहा है। कई निचले इलाकों में जलभराव के कारण पैदल और सड़क से आवाजाही मुश्किल हो सकती है, इसलिए प्रशासन विस्थापित परिवारों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने पर जोर दे रहा है।
हिमाचल में लैंडस्लाइड से 175 से ज्यादा सड़कें बंद
हिमाचल प्रदेश में बुधवार रात तेज बारिश के बाद कई इलाकों में लैंडस्लाइड हुए। इसके चलते प्रदेश में 175 से ज्यादा सड़कें बंद हो गईं। पहाड़ी इलाकों में मलबा आने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे शहरों से आने-जाने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।
कालका-शिमला फोरलेन पर भी भारी मलबा गिरा। इससे कई गाड़ियां रातभर रास्ते में फंसी रहीं। लगातार बारिश के बीच सड़कें बंद होने से जरूरी सेवाओं और स्थानीय आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है।
हिमाचल में बारिश के कारण सड़क और रेल कनेक्टिविटी पहले भी प्रभावित हुई है। कालका-शिमला रेल सेवा भी एक क्षतिग्रस्त पुलिया के कारण 11 सितंबर तक निलंबित की गई है।
तीनों राज्यों में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ीं
बिहार में बाढ़ का सबसे बड़ा असर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों पर है। गंगा और दूसरी नदियों का जलस्तर बढ़ने से लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ सकता है, जबकि खेतों में पानी भरने से किसानों की परेशानी बढ़ सकती है।
वाराणसी में हजारों लोगों के विस्थापन के बाद राहत शिविरों और नावों के जरिए प्रशासन को लगातार निगरानी रखनी पड़ रही है। वहीं हिमाचल में सड़कें बंद होने से यात्रियों, स्थानीय कारोबार और जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है।
बारिश और नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए तीनों राज्यों के प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना जरूरी है। खासकर नदी किनारे, निचले क्षेत्रों और लैंडस्लाइड संभावित पहाड़ी रास्तों पर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत है।
