September 4, 2026

Pm Modi के Mental Naxal शब्द पर Captain Amarinder Singh ने जताया ऐतराज

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Pm Modi के Mental Naxal शब्द पर Captain Amarinder Singh ने जताया ऐतराज

Pm Modi| Mental Naxal| Captain Amarinder Singh| पंजाब विधानसभा चुनावों की बिसात बिछने से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने न सिर्फ सूबे की बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से इस्तेमाल किए गए ‘मेंटल नक्सल’ शब्द पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसकी स्पष्ट परिभाषा मांगी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को यह साफ करना चाहिए कि देश में लोकतांत्रिक तरीके से जाहिर की जाने वाली जायज असहमति और विरोध को इस शब्द के दायरे से बाहर कैसे रखा जाएगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम लोकतांत्रिक आजादी की बहस

एक विशेष लेख के जरिए अपनी बात रखते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लिखा कि ‘नक्सल’ जैसे संवेदनशील शब्द का इस्तेमाल बेहद सतर्कता से किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र को कभी भी राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के बीच किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

कैप्टन के मुताबिक, अगर इन दोनों अवधारणाओं को सही मायने में समझा जाए, तो सुरक्षा और स्वतंत्रता एक-दूसरे को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाती हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार यह स्पष्ट करे कि ‘मेंटल नक्सली’ तय करने का पैमाना क्या है, ताकि नीतियों की आलोचना करने वाले आम नागरिकों को निशाना न बनाया जा सके।

पंजाब में सियासी जमीन तलाश रही BJP के लिए बढ़ा धर्मसंकट

कैप्टन अमरिंदर सिंह का यह रुख ऐसे वक्त में सामने आया है जब भारतीय जनता पार्टी पंजाब में बिना किसी क्षेत्रीय सहयोगी के, पूरी तरह अपने दम पर सियासी पैर जमाने की कोशिशों में जुटी है।

राज्य में किसान आंदोलनों, युवाओं के मुद्दों और सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटी भाजपा के लिए पार्टी के ही सबसे कद्दावर सिख चेहरे का यह बयान रणनीतिक रूप से बड़ी असहजता पैदा कर सकता है। विपक्षी दल पहले ही भाजपा पर असहमति की आवाज दबाने का आरोप लगाते रहे हैं, ऐसे में कैप्टन की यह टिप्पणी विरोधी खेमे को एक बड़ा राजनीतिक हथियार दे सकती है।

चुनावी माहौल में कूटनीतिक संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस लेख के जरिए एक तीर से कई निशाने साधे हैं। पंजाब की राजनीति हमेशा से केंद्र के किसी भी ऐसे रुख के प्रति संवेदनशील रही है जिसे ‘सख्त’ या ‘दमनकारी’ माना जाए।

ऐसे में चुनाव से ठीक पहले खुद को पंजाब के हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रहरी के रूप में पेश करके कैप्टन ने अपनी धर्मनिरपेक्ष और राज्य-हितैषी छवि को फिर से मजबूत करने की कोशिश की है। अब देखना यह होगा कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अपने ही इस वरिष्ठ नेता के सवालों का क्या जवाब देता है।

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