September 3, 2026

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में एंट्री-फोटो पर रोक के खिलाफ याचिका ठुकराई, अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई इनकार

0
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में एंट्री-फोटो पर रोक के खिलाफ याचिका ठुकराई, अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में एंट्री-फोटो पर रोक के खिलाफ याचिका ठुकराई

Supreme Court News: राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश तथा फोटो-वीडियो बनाने पर लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 3 सितंबर को सुनवाई से इनकार कर दिया। प्रिया मिश्रा की ओर से दायर याचिका की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने की।

पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं है। अदालत के इस आदेश का मतलब यह है कि इस याचिका के जरिए लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर विस्तृत संवैधानिक फैसला नहीं दिया है।

राजस्थान में 16 अगस्त के सर्कुलर को दी गई थी चुनौती

याचिका में राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 16 अगस्त 2026 को जारी सर्कुलर को चुनौती दी गई थी। इसमें सरकारी स्कूल परिसर में किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य से पहले अनुमति लेने की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा स्कूल में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइवस्ट्रीमिंग के लिए भी पूर्व लिखित अनुमति जरूरी की गई। याचिका में कहा गया कि ऐसे व्यापक प्रतिबंध सार्वजनिक हित में सरकारी स्कूलों की स्थिति को रिकॉर्ड करने और सामने लाने में बाधा बन सकते हैं।

UP के कई जिलों में भी इसी तरह के निर्देश

याचिका में उत्तर प्रदेश के अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से 19 अगस्त को जारी आदेश का भी हवाला दिया गया। इसके तहत बाहरी लोगों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों को सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना परिषद के स्कूलों में प्रवेश करने और फोटो-वीडियो बनाने से रोका गया था।

याचिका के मुताबिक, आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा समेत कई अन्य जिलों में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे।

याचिका में किन मौलिक अधिकारों का हवाला दिया गया?

प्रिया मिश्रा की याचिका में इन प्रतिबंधों को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ए), 19(1)(जी), 21 और 21-ए के तहत मिले अधिकारों से जोड़ा गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में सार्वजनिक संस्थानों से जुड़ी जानकारी को वैध तरीके से लोगों तक पहुंचाना भी शामिल है।

याचिका में बच्चों की निजता, गरिमा और सुरक्षा की जरूरत को भी स्वीकार किया गया था। साथ ही तर्क दिया गया कि बच्चों की पहचान या निजी जानकारी रिकॉर्ड करने और सरकारी स्कूल की इमारत, शौचालय, पेयजल, बिजली, फर्नीचर या अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति दर्ज करने में अंतर किया जाना चाहिए।

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच क्यों उठा विवाद?

यह मामला ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच सामने आया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का यह अभियान सरकारी स्कूलों की बदहाल बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को सामने लाने पर केंद्रित है।

अभियान के दौरान स्कूलों में टूटे शौचालय, खराब कक्षाएं, पेयजल, फर्नीचर और दूसरी सुविधाओं की स्थिति को रिकॉर्ड कर सार्वजनिक करने की कोशिश की गई। राजस्थान में बाहरी लोगों की एंट्री और फोटो-वीडियो पर प्रतिबंध के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का रूप लिया।

आम लोगों और सरकारी स्कूलों पर क्या असर?

सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री और रिकॉर्डिंग पर अनुमति की शर्त का सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की स्वतंत्र निगरानी या दस्तावेजीकरण करना चाहते हैं। दूसरी ओर, स्कूल प्रशासन के लिए बच्चों की निजता, सुरक्षा और परिसर की व्यवस्था बनाए रखना भी अहम जिम्मेदारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को सुनने से इनकार किया है, लेकिन आदेशों की संवैधानिक वैधता पर कोई विस्तृत राय नहीं दी है। इसलिए फिलहाल इस मामले में सार्वजनिक निगरानी और बच्चों की सुरक्षा के बीच संतुलन का सवाल खुला हुआ है।

याचिकाकर्ता ने क्या तर्क दिया?

याचिका में दावा किया गया कि इन प्रतिबंधों से संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ए), 19(1)(जी), 21 और 21-ए के तहत मिले मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में वैध पत्रकारिता और सार्वजनिक संस्थानों से जुड़ी जानकारी को लोगों तक पहुंचाना भी शामिल है। हालांकि, याचिका में यह भी माना गया कि बच्चों की निजता, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed