Punjab Cmo Corruption Case में CBI-ED का जवाब पेश नहीं, 4 सितंबर को होगी सुनवाई

Punjab and Haryana High Court
Punjab Cmo Corruption Case | CBI-ED | : पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में गुरुवार को होने वाली सुनवाई टाल दी गई है। पिछली सुनवाई में अदालत के सख्त रुख के बाद संबंधित जांच एजेंसियों से जवाब मांगा गया था, लेकिन गुरुवार को वह जवाब अदालत के समक्ष पेश नहीं हो सका।
इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की है। उम्मीद जताई जा रही है कि शुक्रवार को संबंधित पक्ष अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल करेंगे, जिसके बाद आगे की जांच की दिशा तय होगी।
यह पूरा मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) को लिखे गए तीन बहुचर्चित पत्रों से जुड़ा है। ED का दावा है कि इन पत्रों के जरिए कथित भ्रष्टाचार से जुड़े अहम साक्ष्य पंजाब पुलिस के साथ साझा किए गए थे और नियम सम्मत एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था।
अब शुक्रवार को होने वाली सुनवाई इस लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है कि पंजाब पुलिस यह स्पष्ट करेगी कि केंद्रीय एजेंसी के इन पत्रों पर उसने क्या कदम उठाए।
24 जुलाई से 7 अगस्त तक ED ने तीन बार खटखटाया था DGP का दरवाजा
अदालत में पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने यह सनसनीखेज खुलासा किया था कि ED ने केवल एक बार नहीं, बल्कि लगातार तीन बार—24 जुलाई, 30 जुलाई और 7 अगस्त को पंजाब पुलिस प्रमुख को पत्र भेजे थे। इन पत्रों में पंजाब सीएमओ से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत और दस्तावेज संलग्न किए जाने की बात कही गई थी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL No. 238/2026) पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को भी पक्षकार बनाया था और नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। अदालत मुख्य रूप से इस बात की पड़ताल कर रही है कि जब एक केंद्रीय एजेंसी ने साक्ष्य सौंपे, तो राज्य की पुलिस मशीनरी ने उस पर प्राथमिक जांच या एफआईआर दर्ज करने में क्या तत्परता दिखाई।
अकाली दल के तीखे हमले, सरकार से मांगा जवाब
मामला अदालत में तूल पकड़ते ही पंजाब की सियासत में भी उबाल आ गया है। विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधा निशाना साधा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय शुरुआत से ही इन पत्रों के वजूद को खारिज करते रहे और कानूनी कार्रवाई की धमकियां देते रहे, जबकि अदालत के पटल पर सच्चाई सामने आ चुकी है।
अकाली दल ने मांग की है कि मुख्यमंत्री को पूरे प्रकरण पर पंजाब की जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। बहरहाल, आरोपों की सच्चाई और जांच का अगला पड़ाव क्या होगा, यह शुक्रवार को हाईकोर्ट में दाखिल होने वाले जवाबों से ही तय हो पाएगा।
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