Narnaul : डीपफेक और एआई तकनीक से बड़े क्राइम की फिराक में ठग, नारनौल एसपी बोले-परिवार के लिए तय करें सीक्रेट कोड

नारनौल पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार जेवरिया
Narnaul : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के इस दौर में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक बेहद खतरनाक और नया पैंतरा अपना लिया है। अब ठग एआई आधारित वॉयस क्लोनिंग के जरिए किसी भी व्यक्ति की हूबहू आवाज तैयार कर उसके परिजनों और परिचितों को चूना लगा रहे हैं।
बढ़ते इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए महेंद्रगढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) दीपक कुमार ने नारनौल में लोगों को कड़ी चेतावनी देते हुए पूरी तरह सतर्क रहने की अपील की है।

यूट्यूब और सोशल मीडिया से चुरा रहे हैं आवाज
पुलिस के अनुसार, शातिर साइबर अपराधी सोशल मीडिया, यूट्यूब, व्हाट्सएप या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद किसी भी व्यक्ति की मात्र कुछ सेकंड की पुरानी ऑडियो क्लिप का इस्तेमाल करके उसकी नकली आवाज जनरेट कर लेते हैं।
यह आवाज इतनी सटीक और वास्तविक लगती है कि पीड़ित पहली बार में पहचान नहीं पाता कि यह उसके असली परिचित की आवाज है या किसी मशीन की।
इसके बाद ठग परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों को फोन कर खुद को आपात स्थिति (इमरजेंसी) में फंसा हुआ बताते हैं और तुरंत ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने या बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा करने का दबाव बनाते हैं।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि ठग केवल पैसों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे बातचीत के जरिए परिवार, कारोबार और बैंकिंग डिटेल्स जुटाकर भविष्य में किसी बड़े साइबर फ्रॉड को अंजाम दे सकते हैं। एआई तकनीक के इस युग में अब केवल आवाज या वीडियो देखकर किसी की पहचान पुख्ता करना सुरक्षित नहीं रह गया है।

घबराएं नहीं, अपनाएं ये सुरक्षा उपाय
एसपी दीपक कुमार ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी परिचित की आवाज में पैसे या बैंक डिटेल्स की मांग की जाए, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। ऐसे किसी भी कॉल पर तुरंत भरोसा करने के बजाय, संबंधित व्यक्ति के पुराने और पुख्ता मोबाइल नंबर पर खुद कॉल करके सच्चाई की पुष्टि करें।
इसके अलावा, परिवारों को सलाह दी गई है कि वे आपस में एक ‘सीक्रेट कोड वर्ड’ (गुप्त शब्द) तय कर लें, जिसकी जानकारी केवल परिवार के भरोसेमंद सदस्यों को ही हो। यदि कोई इमरजेंसी का दावा करे, तो उससे वह कोड पूछकर उसकी सत्यता जांची जा सकती है।
इसके साथ ही किसी भी व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन (UPI PIN), सीवीवी (CVV) या अन्य बैंक संबंधी गोपनीय जानकारियां साझा न करने की सख्त हिदायत दी गई है।
किसी भी संदिग्ध कॉल या ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नारनौल स्थित स्थानीय साइबर क्राइम थाने और अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, ठगी गई राशि को वापस पाने की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी।
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