Sangrur Mohanjeet Torture Case : संगरूर में सड़कों पर उतरा विपक्ष, 13 सितंबर को सीएम आवास के घेराव का अल्टीमेटम

संगरूर में सड़कों पर उतरा विपक्ष, 13 सितंबर को सीएम आवास के घेराव का अल्टीमेटम
Sangrur Mohanjeet Torture Case : संगरूर के गांव शेरों में करीब चार दिन पहले मुख्यमंत्री की जनसभा के दौरान नशे के मुद्दे पर सवाल पूछने और काले झंडे दिखाने वाले गुरसिख युवक मोहनजीत सिंह के साथ हुई कथित पुलिस प्रताड़ना का मामला अब पंजाब का सबसे बड़ा राजनीतिक तूफान बन चुका है।
मोहनजीत इंसाफ संघर्ष कमेटी की अगुवाई में सोमवार को संगरूर में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय के बाहर एक विशाल राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। हाथ में विरोध के प्रतीक और सिर पर काली पगड़ियां व काले स्कार्फ बांधकर पहुंचे हजारों लोगों ने पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
संघर्ष कमेटी ने मंच से स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 21 सदस्यीय संघर्ष कमेटी की मांगों को सरकार ने तुरंत स्वीकार कर लागू नहीं किया, तो आगामी 13 सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के संगरूर स्थित आवास का अनिश्चितकालीन घेराव किया जाएगा।
प्रताप सिंह बाजवा ने की न्यायिक आयोग के गठन की मांग, कहा- ‘सिर्फ तबादला कोई सजा नहीं’
विशाल धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने पुलिसिया कार्रवाई पर तीखे प्रहार किए। बाजवा ने कहा कि इस मामले में मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन हुआ है, युवक पर अमानवीय यातनाएं ढाने के साथ-साथ उसके ककारों (धार्मिक प्रतीकों) की बेअदबी की गई है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल प्रभाव से एक न्यायिक आयोग (Judicial Commission) का गठन किया जाना चाहिए।
संबंधित पुलिस अधिकारियों के सिर्फ तबादले (Transfer) पर कड़ा ऐतराज जताते हुए बाजवा ने कहा, “अधिकारियों को एक जगह से हटाकर दूसरी जगह भेज देना कोई सजा नहीं है। अतीत में भी ऐसा देखा गया है कि जनता का गुस्सा शांत होते ही ऐसे अफसरों को बहाल कर दिया जाता है।” उन्होंने संघर्ष कमेटी को भरोसा दिलाया कि न्याय की इस लड़ाई में वह और उनकी पार्टी अग्रिम पंक्ति में खड़े रहेंगे।
अकाली दल और अन्य विपक्षी दलों ने आप नेतृत्व को घेरा, अफसरों पर एफआईआर की मांग
धरने में पहुंचे अकाली दल (पुनर्सुरजीत) के वरिष्ठ नेता परमिंदर सिंह ढींडसा ने आम आदमी पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष अमन अरोड़ा पर दोषी पुलिसकर्मियों का बचाव करने का सीधा आरोप लगाया और नैतिक आधार पर उनके इस्तीफे की मांग की।
वहीं, विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि मोहनजीत पर हुआ अत्याचार केवल एक व्यक्ति विशेष का मामला नहीं है, बल्कि यह आम नागरिक के बोलने की आजादी और लोकतंत्रीय अधिकारों पर सीधा हमला है। संघर्ष कमेटी ने साफ कर दिया है कि वे अधिकारियों के तबादले से संतुष्ट नहीं हैं और दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए।
इस राज्य स्तरीय प्रदर्शन में राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक और किसान-मजदूर संगठनों की अभूतपूर्व एकजुटता देखने को मिली। प्रदर्शन में पूर्व एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल, अरविंद खन्ना, विनरजीत सिंह गोल्डी, प्रकाश चंद गर्ग, सुरिंदरपाल सिंह सिबिया, लक्खा सिधाना, भाना सिद्धू, किसान नेता काका सिंह कोटड़ा, एडवोकेट मनप्रीत सिंह नमोल और दमन थिंद बाजवा समेत कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की।
