Narnaul : निजामपुर के तोताहेड़ी गांव में हुई AIKKMS की बैठक, रोहतक महापंचायत का दिया न्योता

गांव तोताहेड़ी में रोहतक महापंचायत को लेकर बैठक करते AIKKMS के पदाधिकारी ।
Narnaul : अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन (AIKKMS) के आह्वान पर आगामी 26 अक्टूबर को रोहतक के नांदल भवन, बोहर में एक विशाल प्रदेश स्तरीय किसान-मज़दूर-छात्र-युवा-महिला महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। इस महापंचायत को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए संगठन की ओर से व्यापक स्तर पर जनसंपर्क और जनजागृति अभियान चलाया जा रहा है।
इसी कड़ी में निजामपुर जनपद के गांव तोताहेड़ी में महापंचायत की तैयारियों को लेकर एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों को बढ़-चढ़कर इस महापंचायत में शामिल होने का न्योता दिया गया।
तोताहेड़ी गांव में हुई तैयारी बैठक
गांव तोताहेड़ी में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे। बैठक में यादराम, राम खिलाड़ी, रामफल, उम्मेद सिंह, रोहतास मास्टर, रामकरण, ओमप्रकाश, सत्यबीर सिंह और किसान संगठन के संगठक ईश्वर सिंह तोताहेड़ी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
बैठक के दौरान एआईकेकेएमएस के जिला सचिव डॉ. व्रतपाल सिंह, छाजूराम रावत और रामस्वरूप नंबरदार (बशीरपुर) ने किसानों को संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि आज समाज का हर कमेरा वर्ग केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण त्रस्त है।
उन्होंने आम जनमानस से अपील की कि वे इस महापंचायत में बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी एकता का परिचय दें। बैठक के अंत में ईश्वर सिंह तोताहेड़ी ने किसान संगठन का आभार व्यक्त किया।
महापंचायत में इन प्रमुख ज्वलंत मुद्दों को उठाया जाएगा
जनसंपर्क अभियान के दौरान किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि रोहतक महापंचायत में मेहनतकश तबके से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा:
भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते से सरकार तुरंत पीछे हटे।
सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के फॉर्मूले पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी दी जाए और सरकारी खरीद सुनिश्चित हो।
देश के किसानों और मजदूरों के सभी कर्ज पूरी तरह माफ किए जाएं।
किसान-विरोधी बिजली बिल और बीज बिल को वापस लिया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों को पूरे साल रोजगार की गारंटी दी जाए।
मंडियों में पोर्टल संबंधी सभी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं समाप्त की जाएं।
खाली पड़े सरकारी पदों पर पारदर्शी और नियमित भर्तियां की जाएं।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते भेदभाव और अत्याचारों पर रोक लगाई जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था की जाए और टेल तक पानी पहुंचाया जाए।
बुजुर्गों को 10,000 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाए और जी का जंजाल बन चुके परिवार पहचान पत्र (फैमिली आईडी) से जनता को मुक्ति दिलाई जाए।
मजदूरों, छोटे कर्मचारियों और स्कीम वर्करों को उनका जायज न्यूनतम वेतन दिया जाए।
स्थानीय किसानों की विशेष मांगें और समस्याएं
जनसंपर्क अभियान के दौरान तोताहेड़ी के किसानों ने अपनी स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से रखा। किसानों ने मांग की कि उन्हें फसल की सिंचाई के लिए पूरी बिजली दी जाए और बिजली आपूर्ति की मियाद 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे की जाए।
इसके अलावा, इस इलाके की प्रमुख खरीफ फसल ‘बाजरा’ की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित करने की जोरदार मांग उठाई गई।
किसानों ने अपने कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि ‘भावांतर भरपाई योजना’ किसानों के लिए मात्र एक छलावा और घाटे का सौदा है। साथ ही, फसल खराबे और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का मुआवजा प्राइवेट बीमा कंपनियों के हवाले करने के बजाय सरकार अपने खजाने से दे, क्योंकि बीमा कंपनियों की अनावश्यक और जटिल शर्तों के कारण किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाता।
इसलिए कृषि क्षेत्र से प्राइवेट बीमा कंपनियों को बाहर किया जाए और आवारा पशुओं से फसलों को बचाने के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
छाजूराम रावत ने कहा कि पूंजीपतियों के अरबों-खरबों रुपये के कर्ज तो आसानी से माफ कर दिए जाते हैं, लेकिन दूसरी तरफ देश के पांच लाख से अधिक किसानों और खेत मजदूरों ने कर्ज न चुका पाने के कारण आत्महत्या कर ली है। आज खेती पूरी तरह से घाटे का सौदा साबित हो रही है, ऐसे में आम जनता का हक पाने के लिए इस महापंचायत में जुटना बेहद जरूरी है।
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