ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा: अमेरिका ने 5 ईरानी तेल टैंकरों पर किया हमला, जवाब में ईरान ने दागी मिसाइल

5 तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमला
US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव 8 सितंबर को एक और सैन्य टकराव में बदल गया। अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े पांच तेल टैंकरों पर हमला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश के जवाब में की गई। CENTCOM ने बताया कि अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में चार तेल टैंकरों और खार्ग द्वीप के पास एक अन्य टैंकर को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन पांचों टैंकरों के चालक दल को हमले से पहले जहाज खाली करने का निर्देश दिया गया था।
अरबों डॉलर के शैडो नेटवर्क से जुड़ाव का अमेरिकी दावा
अमेरिका ने दावा किया कि जिन पांच तेल टैंकरों पर कार्रवाई की गई, वे अरबों डॉलर के एक शैडो नेटवर्क का हिस्सा थे। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह नेटवर्क ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) और उसके सहयोगियों के लिए धन जुटाने का काम करता है।इस कार्रवाई का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने से ईरान के तेल कारोबार और खाड़ी क्षेत्र से होने वाले ऊर्जा परिवहन पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमला नाकाम होने का दावा
CENTCOM के अनुसार, ईरान ने पिछले दो दिनों में अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की। अमेरिकी सेना का कहना है कि युद्धपोत ने दोनों हमलों को नाकाम कर दिया। CENTCOM ने कहा कि इस घटना में किसी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं हुआ। अमेरिकी युद्धपोत इलाके में अपनी गश्त जारी रखे हुए है। अमेरिका ने पांच तेल टैंकरों पर कार्रवाई को इसी घटनाक्रम से जोड़ते हुए इसे जवाबी कदम बताया है।
जवाब में ईरान ने जॉर्डन की ओर दागीं 20 मिसाइलें
अमेरिकी हमले के कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी होने के कारण यह हमला अमेरिका-ईरान तनाव को एक नए भौगोलिक क्षेत्र तक ले जाता है। अगर ऐसे हमले लगातार होते हैं, तो क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट में 10 जहाजों पर हमले का ईरानी दावा
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में 10 जहाजों पर हमले का दावा भी किया है। ईरान के मुताबिक, इनमें दो अमेरिकी जहाज और आठ तेल टैंकर शामिल हैं। ईरान ने कहा कि ये जहाज प्रतिबंधित इलाके से गुजर रहे थे। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है, इसलिए यहां जहाजों पर किसी भी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
रूबियो की चेतावनी– अमेरिकी जहाज पर हमला हुआ तो जवाब मिलेगा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कोलंबिया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ईरान को खुली चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमले की कोशिश का जवाब दिया जाएगा। रूबियो के बयान से साफ है कि अमेरिका ईरानी हमलों की स्थिति में आगे भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ऐसे में तेल टैंकरों, युद्धपोतों और खाड़ी क्षेत्र के समुद्री रास्तों पर बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान टकराव का अहम मोर्चा बन सकता है।
आम लोगों के लिए क्यों अहम है होर्मुज का तनाव?
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने का असर मध्य पूर्व से काफी दूर तक पहुंच सकता है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल का अंतरराष्ट्रीय कारोबार होता है और जहाजों की आवाजाही बाधित होने पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।
तेल महंगा होने का असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, माल ढुलाई और कई दूसरी वस्तुओं की लागत पर पड़ सकता है। इसलिए अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव केवल सैन्य खबर नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और आम उपभोक्ताओं के लिए भी अहम घटनाक्रम है।
