US Iran Conflict: अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, ईरान में 12 की मौत, 68 घायल, दो अमेरिकी बेस पर जवाबी हमले का दावा

अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, ईरान में 12 की मौत
US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात ईरान के सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन स्ट्राइक की। ईरान के मुताबिक इन हमलों में 12 लोगों की मौत हुई और 68 लोग घायल हुए हैं। अमेरिका का कहना है कि उसकी सेना ने केवल ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर स्ट्राइक करने का दावा किया है। इससे पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में दो तेल टैंकरों के सी माइंस से टकराने की खबर ने समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
शादी समारोह में मिसाइल गिरने से 5 की मौत का दावा
ईरान का दावा है कि सिरिक में एक शादी समारोह के दौरान मिसाइल गिर गई। इसमें पांच लोगों की मौत हुई, जिनमें चार साल का एक बच्चा भी शामिल है। खुजस्तान प्रांत में हुए एक अन्य हमले में सात लोगों की मौत और आठ लोगों के घायल होने की जानकारी ईरान की ओर से दी गई है। हालांकि, अमेरिका ने इन हमलों में नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप से इनकार करते हुए कहा है कि उसके हमले केवल ईरानी सैन्य ठिकानों पर किए गए।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद गालिबाफ ने शादी समारोह पर हुए हमले को लेकर अमेरिका पर निशाना साधा। उन्होंने X पर लिखा, “जो ताकत शैतान की तरह काम करे, लोगों को मारे और निशाना बनाए, वह शैतान ही है।”
मीनाब स्कूल हमले का भी गालिबाफ ने किया जिक्र
मोहम्मद गालिबाफ ने मीनाब के एक स्कूल पर हुए हमले का भी जिक्र किया। ईरान का दावा है कि इस हमले में 156 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 120 बच्चे शामिल थे। अमेरिका का कहना है कि वह ईरान के सैन्य ठिकानों को ही निशाना बना रहा है। दोनों पक्षों के इन दावों के बीच हमलों में मारे गए लोगों और निशाना बनाए गए ठिकानों को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
ईरान ने जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी बेस पर जवाबी हमले का दावा किया
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर स्ट्राइक करने का दावा किया है। इससे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले दूसरे देशों के भी सीधे संघर्ष की चपेट में आने की आशंका बढ़ गई है। इससे पहले 30 अगस्त को अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित लारक द्वीप पर दो ईरानी रॉकेट लॉन्चरों के खिलाफ हवाई हमला किया था। इसके बाद क्षेत्र में अमेरिकी और ईरानी सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में दो तेल टैंकर सी माइंस से टकराए
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो ऑयल टैंकर सी माइंस से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे के बाद दोनों जहाजों पर मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकालना पड़ा।
IRGC के अनुसार, दोनों टैंकर उसकी चेतावनी के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट में एक “अवैध रास्ते” से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। इससे पहले ऐसी जानकारी भी सामने आई थी कि अमेरिकी सेना ने दो ईरानी टैंकरों को निशाना बनाया है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर इसका असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिकी सेना द्वारा दो ईरानी टैंकरों को निशाना बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इस कार्रवाई को लेकर अभी ज्यादा विवरण सामने नहीं आया है। ऐसे समय में जब होर्मुज स्ट्रेट में पहले ही दो टैंकरों के क्षतिग्रस्त होने की खबर है, समुद्री मार्ग पर बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए चिंता बढ़ा रही हैं।
USS अब्राहम लिंकन थाईलैंड पहुंचा
अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन बुधवार को थाईलैंड पहुंचा। यह युद्धपोत 200 दिनों से ज्यादा समय तक लगातार समुद्र में रहने के बाद पांच दिन के आराम के लिए थाईलैंड के बंदरगाह पर रुका है। इस विमानवाहक पोत पर करीब 5,000 सैनिक और कर्मचारी तैनात हैं। यह पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े मिशन पर था और लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण जहाज पर तैनात कर्मियों को किसी बंदरगाह पर रुकने का मौका नहीं मिला था।
लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मौजूद लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और रहने की परिस्थितियों को लेकर भी चिंता जताई गई है। ऐसे में पांच दिन का ठहराव अमेरिकी नौसैनिक कर्मियों को आराम देने के लिहाज से अहम है।
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