Miracle Fruit Benefits: यह छोटा सा लाल फल खाने के बाद खट्टा नींबू भी लगने लगता है मीठा, जानें इसके पीछे का विज्ञान

यह छोटा सा लाल फल खाने के बाद खट्टा नींबू भी लगने लगता है मीठा, जानें इसके पीछे का विज्ञान
Miracle Fruit Benefits: दुनिया में भांति-भांति के फल पाए जाते हैं—कोई बेहद मीठा, तो कोई तीखा या खट्टा। लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसे फल की कल्पना की है, जिसे चखने के बाद अगर आप कच्चा नींबू या सिरका भी गटक लें, तो वह आपको चाशनी जैसा मीठा लगने लगे? सुनने में भले ही यह किसी जादूगर का करतब लगे, लेकिन वनस्पति विज्ञान की दुनिया में यह शत-प्रतिशत सच है। पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय जंगलों में पाए जाने वाले इस छोटे से लाल फल को दुनिया ‘मिरेकल फ्रूट’ (Miracle Fruit) के नाम से जानती है।
आखिर कैसे खट्टे को मीठे में बदल देता है यह फल?
वैज्ञानिक भाषा में ‘सिन्सेपलम डुलसिफिकम’ (Synsepalum dulcificum) कहे जाने वाले और सपोटेसी परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस फल में एक खास किस्म का ग्लाइकोप्रोटीन पाया जाता है, जिसे ‘मिराकुलिन’ (Miraculin) कहते हैं। जब कोई व्यक्ति इस बेरी जैसे फल को खाता है, तो मिराकुलिन प्रोटीन जीभ पर मौजूद स्वाद ग्रंथियों (Taste Receptors) से मजबूती से चिपक जाता है।
इसके बाद जब भी कोई अम्लीय या खट्टी चीज मुंह में जाती है, तो यह प्रोटीन एक्टिव होकर दिमाग को खट्टे की जगह मीठे स्वाद का सिग्नल भेजने लगता है। यानी भोजन की एसिडिटी वही रहती है, लेकिन हमारे चखने का अहसास बदल जाता है। इसका असर करीब आधा से एक घंटे तक बना रहता है।
कैंसर मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है यह ‘जादुई बेरी’
मिरेकल फ्रूट महज स्वाद का खिलौना भर नहीं है, बल्कि इसका औषधीय और व्यावहारिक उपयोग भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। खासतौर पर केमोथेरेपी और रेडिएशन से गुजर रहे कैंसर मरीजों के लिए यह फल किसी वरदान से कम नहीं है।
भारी दवाओं के प्रभाव से अक्सर मरीजों के मुंह का स्वाद धातु जैसा या बेहद कड़वा हो जाता है, जिससे उनकी भूख खत्म हो जाती है। अमेरिका के कई बड़े कैंसर अस्पतालों में मरीजों को भोजन से पहले यह ‘मिरेकल बेरी’ दी जा रही है, जिससे उन्हें भोजन का स्वाद बेहतर लगता है और वे जरूरी पोषण आसानी से ले पाते हैं।
जल्दी खराब होने की चुनौती, अब फ्रीज-ड्राइड तकनीक से हो रही सप्लाई
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इस अनूठे फल की सबसे बड़ी लाचारी यह है कि पेड़ से टूटने के बाद यह बहुत जल्दी खराब हो जाता है। ताजा फल को लंबी दूरी तक ले जाना बेहद कठिन काम है।
इसी वजह से अब इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए ‘फ्रीज-ड्राइंग’ तकनीक का सहारा लिया जा रहा है या इसके एक्सट्रैक्ट से गोलियां और पाउडर तैयार किए जा रहे हैं। मूल रूप से घाना और पश्चिमी अफ्रीका में पैदा होने वाले इस पौधे की व्यावसायिक खेती अब अमेरिका के मियामी और फ्लोरिडा के इलाकों में भी बड़े पैमाने पर की जा रही है, ताकि कम चीनी वाले खाद्य पदार्थों में इसका प्राकृतिक उपयोग किया जा सके।
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