Hansi Samadha Mandir: हांसी के समाधा मंदिर का होगा कायाकल्प, हवा में तैरते बरगद को देखने उमड़ती है भीड़

हांसी के समाधा मंदिर का होगा कायाकल्प, हवा में तैरते बरगद को देखने उमड़ती है भीड़
Hansi Samadha Mandir: हरियाणा के हांसी में स्थित ऐतिहासिक समाधा मंदिर अपनी गहरी आध्यात्मिक आस्था, अनूठी लोक-मान्यताओं और सदियों पुराने इतिहास के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात है। प्रतिदिन यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक होने पहुंचते हैं। हांसी को राज्य का 23वां जिला बनाए जाने के बाद अब सरकार और स्थानीय प्रशासन ने इस धार्मिक स्थल का कायाकल्प करने की व्यापक योजना तैयार की है। गौसाई गेट से करीब एक किलोमीटर दूर शहर के दक्षिण-पश्चिम कोने में बसा यह मंदिर अब नए कलेवर में नजर आएगा।
सिसाय पुल से मंदिर तक बनेगा स्मार्ट रोड, सजेंगे 7 सेल्फी प्वाइंट
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नगर परिषद ने समाधा मंदिर तक जाने वाले रास्ते को अत्याधुनिक ‘स्मार्ट रोड’ में बदलने का निर्णय लिया है। योजना के मुताबिक, सिसाय पुल से मंदिर तक सड़क के दोनों ओर आकर्षक रंगीन टाइलें बिछाई जाएंगी। पूरे मार्ग को सुंदर लाइटिंग और हरियाली से सजाया जाएगा। दर्शन के लिए आने वाले बुजुर्गों और यात्रियों के विश्राम के लिए बेंचें लगाई जाएंगी। इसके अलावा, युवाओं और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए मार्ग में लगभग सात खूबसूरत सेल्फी प्वाइंट भी तैयार किए जाएंगे।
कुदरत का करिश्मा: हवा में तैरती दिखती है बरगद के पेड़ की जड़
समाधा मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही सबसे पहला ध्यान यहां मौजूद बरगद के विशालकाय पेड़ पर जाता है, जो बरसों से कौतूहल का विषय बना हुआ है। इस पेड़ की मुख्य जड़ जमीन को छूती नहीं है, बल्कि तने और जमीन के बीच करीब एक फुट का साफ अंतर दिखाई देता है।
पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है मानो यह भारी-भरकम पेड़ हवा में लटका हुआ हो। दरअसल, इसकी मजबूत और मोटी शाखाएं पास ही स्थित एक अन्य पेड़ पर टिकी हुई हैं, जिससे इसे कुदरती सहारा मिलता है। इस अनोखी प्राकृतिक संरचना को स्थानीय लोग और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु किसी चमत्कार से कम नहीं मानते।
16वीं सदी के संत बाबा जगन्नाथ पुरी की तपोभूमि, पाखंड के खिलाफ उठाई थी आवाज
समाधा मंदिर का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंध 16वीं शताब्दी के महान सिद्ध संत बाबा जगन्नाथ पुरी जी से जुड़ा हुआ है। मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने ही इस पावन स्थल की नींव रखी थी और यहीं उनकी समाधि स्थित है।
इतिहास और किंवदंतियों के मुताबिक, बाबा जगन्नाथ पुरी का जन्म 1570 ईस्वी में भाद्रपद (भादो) मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी को भिवानी के तोशाम में एक राजपूत परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सूरजाराम तंवर था। संत जगन्नाथ पुरी ने तत्कालीन समाज में व्याप्त अंधविश्वास, पाखंड और भेदभाव के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई थी। उन्होंने ताउम्र लोगों को आपसी सौहार्द, प्रेम और जीव-दया का संदेश दिया, जिसकी छाप आज भी इस पावन धाम में देखने को मिलती है।
