Haryana Rice Millers: हरियाणा में 5 लाख मीट्रिक टन चावल डिलीवरी का रास्ता साफ, समय पर काम पूरा करने वाले मिलर्स को मिलेगा बोनस

हरियाणा में 5 लाख मीट्रिक टन चावल डिलीवरी का रास्ता साफ, समय पर काम पूरा करने वाले मिलर्स को मिलेगा बोनस
Haryana Rice Millers: हरियाणा में धान की बंपर पैदावार के बीच चावल के उठान, भंडारण और बोनस भुगतान की दिक्कतों से जूझ रहे राइस मिलर्स के लिए राहत भरी खबर आई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के हस्तक्षेप के बाद केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने चावल वापसी की अंतिम समय सीमा को बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के राइस मिलरों का रुका हुआ लगभग 5 लाख मीट्रिक टन बकाया चावल केंद्रीय पूल में जमा कराने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
कैथल बैठक की चेतावनी के बाद एक्शन में आई सरकार
गौरतलब है कि हाल ही में कैथल में आयोजित राज्यस्तरीय बैठक में राइस मिलर्स ने सख्त रुख अपनाया था। मिलरों ने चेतावनी दी थी कि अगर उनके बकाया चावल की डिलीवरी नहीं ली गई और समस्याएं नहीं सुलझीं, तो वे आगामी खरीफ-2026 सीजन में सरकारी धान की खरीद का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे। इस अल्टीमेटम के बाद प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ मिलरों की सीधी बातचीत करवाई। इसके बाद ही केंद्र सरकार ने तुरंत समय सीमा बढ़ाने का आधिकारिक पत्र जारी किया।
30 जून 2025 तक डिलीवरी देने वालों को बोनस का भरोसा
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया है कि जिन राइस मिलर्स ने 30 जून 2025 की तय समय सीमा के भीतर अपने चावल की डिलीवरी पूरी कर दी थी, उन्हें घोषित बोनस दिया जाएगा। इसके साथ ही मिलरों की बाकी बची लंबित मांगों का निपटारा भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। चावल के उठान में तेजी लाने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदाम और डिपो अब हफ्ते के सातों दिन खुले रहेंगे, ताकि गाड़ियों को अनलोडिंग के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।
धान खरीद के कोटे पर केंद्र से दोबारा होगी बात
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र से पिछले सीजन के लिए 62 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का कोटा मंजूर करने का अनुरोध किया था। केंद्र ने शुरुआती कोटे को 54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 59.62 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। बाकी बचे 2.38 लाख मीट्रिक टन के अतिरिक्त कोटे को लेकर राज्य सरकार एक बार फिर केंद्र से पत्राचार और उच्च स्तरीय बातचीत करेगी, ताकि प्रदेश के किसानों और व्यापारियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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