Chandigarh News: चंडीगढ़ में रोजाना 70 टन मिश्रित कचरा डंपिंग ग्राउंड पहुंच रहा, NGT सुनवाई से पहले निगम को निर्देश

चंडीगढ़ में रोजाना 70 टन मिश्रित कचरा डंपिंग ग्राउंड पहुंच रहा
Chandigarh News: चंडीगढ़ में कचरा प्रबंधन की कमियों को दूर करने के लिए यूटी प्रशासन ने नगर निगम को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में नवंबर में होने वाली सुनवाई से पहले प्रशासन ने रोजाना करीब 70 टन मिश्रित कचरा डंपिंग ग्राउंड पहुंचने, सीवरेज के लंबित काम और कुछ जगहों से सीवेज डिस्चार्ज की समस्या पर विशेष ध्यान देने को कहा है।
यूटी के चीफ सेक्रेटरी एच. राजेश प्रसाद की अध्यक्षता में सोमवार को हाईलेवल रिव्यू मीटिंग हुई। इसमें NGT केस नंबर 606/2018 के तहत चल रहे कामों और अनुपालन की समीक्षा की गई। बैठक में चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (CPCC) के अधिकारी भी मौजूद रहे।
रोजाना 70 टन मिश्रित कचरा बड़ी चुनौती
बैठक में सबसे बड़ी चिंता रोजाना करीब 70 TPD मिश्रित कचरा डंपिंग ग्राउंड पहुंचने को लेकर जताई गई। प्रशासन ने नगर निगम को सोर्स पर 100 प्रतिशत कचरा सेग्रीगेशन सुनिश्चित करने और मिश्रित कचरे की मात्रा लगातार घटाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक गांवों और उन इलाकों से ज्यादा मिश्रित कचरा आ रहा है, जहां अभी सेग्रीगेशन व्यवस्था कमजोर है। इन क्षेत्रों में अलग-अलग कचरा संग्रह सुनिश्चित करने के लिए वेस्ट कलेक्टरों के साथ MoU करने को निगम हाउस पहले ही मंजूरी दे चुका है।
डंपिंग ग्राउंड में 3 हजार टन तक कचरा जमा
बारिश के कारण पिछले कुछ दिनों में कचरे की प्रोसेसिंग प्रभावित हुई है। इसके चलते डंपिंग ग्राउंड पर करीब 2,500 से 3,000 टन मिश्रित कचरा फिलहाल प्रोसेसिंग का इंतजार कर रहा है। प्रशासन ने निगम को इस जमा कचरे को 30 अक्टूबर तक पूरी तरह प्रोसेस करने का लक्ष्य दिया है। साथ ही साफ किया गया है कि इस अवधि में डंपिंग ग्राउंड पर मिश्रित कचरे का नया स्टॉक जमा नहीं होना चाहिए।
अगर सोर्स पर कचरे को अलग नहीं किया जाता, तो प्रोसेसिंग का दबाव बढ़ता है और डंपिंग ग्राउंड पर जमा कचरे को संभालना मुश्किल होता है। इसका असर शहर की सफाई व्यवस्था और आसपास के पर्यावरण पर भी पड़ सकता है।
4,496 चालान के बावजूद सेग्रीगेशन में कमी
नगर निगम ने बैठक में बताया कि इस साल जनवरी से मई के बीच कचरे की सेग्रीगेशन नहीं करने पर 4,496 चालान किए गए। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में सोर्स सेग्रीगेशन का गैप बना हुआ है। प्रशासन ने जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बल्क वेस्ट जनरेटरों की पहचान कर नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है।
सीवरेज और STP के काम भी जल्द पूरे होंगे
ठोस कचरे के साथ प्रशासन ने लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के लंबित कामों को भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सुखना चो में जाने वाली नई सीवर लाइन का काम तेज करने और फैदा गांव में नवनिर्मित दोनों STP को जल्द चालू करने को कहा गया है। इसके अलावा टर्शियरी ट्रीटेड वाटर के कनेक्शन देने की प्रक्रिया में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन चाहता है कि NGT की नवंबर में होने वाली सुनवाई से पहले सभी लंबित काम पूरे हों और कचरा प्रबंधन व्यवस्था में कोई नया गैप सामने न आए।
चंडीगढ़ में इसका सीधा असर शहर की सफाई, कचरे की प्रोसेसिंग और सीवरेज प्रबंधन पर पड़ेगा। प्रशासन की समीक्षा का मुख्य फोकस अब सिर्फ कचरा उठाने पर नहीं, बल्कि घर और संस्थान के स्तर पर कचरे की सही सेग्रीगेशन से लेकर उसके वैज्ञानिक प्रोसेसिंग तक पूरी व्यवस्था को सुधारने पर है।
