September 15, 2026

Bollywood News: दिलजीत दोसांझ भी हुए गोविंदा के मुरीद, लाइव में गाया ‘केम छो’, बोले—गोविंदा जैसा न कोई हुआ, न होगा

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Bollywood News: दिलजीत दोसांझ भी हुए गोविंदा के मुरीद, लाइव में गाया 'केम छो', बोले—गोविंदा जैसा न कोई हुआ, न होगा

दिलजीत दोसांझ भी हुए गोविंदा के मुरीद, लाइव में गाया 'केम छो', बोले—गोविंदा जैसा न कोई हुआ, न होगा

Bollywood News: बॉलीवुड के ‘नंबर वन’ स्टार गोविंदा भले ही पिछले कुछ समय से बड़े पर्दे से दूरी बनाए हुए हों, लेकिन दर्शकों के दिलों पर उनका राज आज भी बरकरार है। 90 के दशक में अपनी अनूठी कॉमेडी, जबरदस्त डांस और बेमिसाल टाइमिंग से सिनेमाघरों में तालियां बजवाने वाले गोविंदा के प्रशंसकों में अब मशहूर पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ का नाम भी जुड़ गया है। इन दिनों अपने ‘ऑरा वर्ल्ड टूर’ (Aura World Tour) में व्यस्त दिलजीत ने गोविंदा के प्रति अपना सम्मान और दीवानगी जाहिर की है।

अहमदाबाद शो की चर्चा और ‘केम छो’ गाना

सोमवार को दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम पर लाइव आकर अपने फैंस के साथ दिल खोलकर बातें कीं। बातचीत के दौरान जब उन्होंने अपने आगामी अहमदाबाद कॉन्सर्ट का जिक्र किया, तो उनके मुंह से अचानक गोविंदा की सुपरहिट फिल्म ‘जिस देश में गंगा रहता है’ का ब्लॉकबस्टर गाना ‘केम छो’ निकल पड़ा। गाना गुनगुनाने के बाद दिलजीत खुद को रोक नहीं पाए और गोविंदा की तारीफों के पुल बांधने लगे। दिलजीत ने कहा कि गोविंदा भारतीय सिनेमा के ऐसे सितारे हैं, जिनकी जगह कोई दूसरा कलाकार कभी नहीं ले सकता।

‘गोविंदा जैसा कलाकार न हुआ है और न होगा’

अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए दिलजीत ने कहा कि गोविंदा अपने आप में कला का एक अनूठा स्कूल हैं। उनकी कॉमेडी टाइमिंग का कोई मुकाबला ही नहीं है। दिलजीत ने अपनी एक अधूरी ख्वाहिश का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा से गोविंदा के साथ स्क्रीन शेयर करना चाहते थे, लेकिन बदकिस्मती से अब तक उन्हें यह मौका नहीं मिल पाया है। उन्होंने गोविंदा को बॉलीवुड का असली लीजेंड करार दिया, जिनकी ऊर्जा और अभिनय शैली लाजवाब है।

100 करोड़ के दौर में याद आया 90 का सच्चा मनोरंजन

दिलजीत दोसांझ ने 90 के दशक की गोविंदा और निर्देशक डेविड धवन की ऐतिहासिक जोड़ी की भी खूब सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों की जुगलबंदी ने दर्शकों को एक से बढ़कर एक मनोरंजक फिल्में दीं। आज के दौर पर चुटकी लेते हुए दिलजीत ने कहा कि आजकल सिनेमा में सिर्फ 100 करोड़ और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का ही शोर सुनाई देता है, लेकिन गोविंदा की फिल्मों का दौर वह जमाना था जब लोग बिना किसी गणित के सिर्फ शुद्ध मनोरंजन और खुशियां समेटने सिनेमाघर जाया करते थे।

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