Anshul Kataria Bhiwani: भिवानी की बेटी अंशुल का नेशनल में डंका, ट्रिपल जंप में जीता सिल्वर मेडल, पिता के अधूरे सपने को दे रही उड़ान
Anshul Kataria Bhiwani: हरियाणा के भिवानी जिले के विद्या नगर की रहने वाली युवा एथलीट अंशुल कटारिया ने एक बार फिर प्रदेश और अपने जिले का नाम रोशन किया है। उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित नॉर्थ जोन नेशनल प्रतियोगिता में अंशुल ने ट्रिपल जंप स्पर्धा में 10.95 मीटर की शानदार छलांग लगाते हुए सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। बुधवार को राष्ट्रीय मंच पर पदक जीतकर जब अंशुल वापस भिवानी पहुंचीं, तो परिजनों और स्थानीय लोगों ने ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया।
हर्डल रेस से शुरू हुआ सफर, ट्रिपल जंप में मिली पहचान
अंशुल के खेल जीवन की शुरुआत काफी दिलचस्प रही है। उनके पिता विनोद कुमार खुद 400 मीटर हर्डल रेस के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे हैं। पिता के साथ महज 7-8 साल की उम्र से स्टेडियम जाने वाली अंशुल ने शुरुआत में हर्डल रेस से ही मैदान पर कदम रखा था। स्कूली प्रतियोगिताओं में 100 मीटर हर्डल रेस में गोल्ड जीतने के बाद अभ्यास के दौरान कोच और पिता ने नोटिस किया कि उनकी टाइमिंग और जंपिंग टेकऑफ ट्रिपल जंप में कहीं ज्यादा बेहतर है। इसके बाद अंशुल ने अपना मुख्य इवेंट बदल लिया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
आर्थिक तंगी से पिता का टूटा सपना, बेटी को बना रहे चैंपियन
अंशुल की इस कामयाबी के पीछे उनके पिता का त्याग और संघर्ष छिपा है। सिंचाई विभाग में कार्यरत विनोद कुमार बताते हैं कि वे खुद राष्ट्रीय स्तर तक खेले, लेकिन घर की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते आगे नहीं बढ़ सके। अपने अधूरे सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी बड़ी बेटी अंशुल को मैदान में उतारा। विनोद कुमार न केवल अपनी बेटी को तराश रहे हैं, बल्कि इलाके के करीब 30 से 35 जरूरतमंद बच्चों को भी अपने खर्च पर एथलेटिक्स की मुफ्त ट्रेनिंग देते हैं और प्रतियोगिताओं में लेकर जाते हैं।
CBLU की छात्रा का अब अंतरराष्ट्रीय पदक पर निशाना
वर्तमान में चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (CBLU) से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स (BPES) के अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहीं अंशुल अपनी सफलता का श्रेय माता सुमन, पिता विनोद और चाचा धीरज कौशिक के मार्गदर्शन को देती हैं। रोजाना दो से ढाई घंटे कड़ा अभ्यास करने वाली अंशुल का कहना है कि स्टेट में गोल्ड और नॉर्थ जोन नेशनल में सिल्वर जीतना महज एक पड़ाव है। उनका असली सपना भारतीय जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय ट्रैक पर उतरना और देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।
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