September 22, 2026

Himanshu Asian Games: जींद के हिमांशु ने जापान में रचा इतिहास, निशानेबाजी में जीते 2 रजत पदक

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Himanshu Asian Games: जींद के हिमांशु ने जापान में रचा इतिहास, निशानेबाजी में जीते 2 रजत पदक

जींद के हिमांशु ने जापान में रचा इतिहास, निशानेबाजी में जीते 2 रजत पदक

Himanshu Asian Games: जापान के आइची-नागोया में खेले जा रहे एशियन गेम्स-2026 में हरियाणा के छोरे हिमांशु ढिल्लों ने अपनी सटीक निशानेबाजी से देश का परचम लहराया है। जींद जिले के अलेवा (Jind Alewa Shooter Himanshu) गांव से ताल्लुक रखने वाले 20 वर्षीय हिमांशु ने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल (10m Air Rifle Asian Games) प्रतियोगिता में दोहरे पदक पर निशाना साधते हुए व्यक्तिगत और टीम स्पर्धा, दोनों में रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किए।

इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हिमांशु को बधाई (Nayab Singh Saini Congratulations) दी और कहा कि उनकी यह कामयाबी प्रदेश और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।

 

टीम और व्यक्तिगत दोनों वर्गों में दिखाया दम

हिमांशु ने प्रतियोगिता की शुरुआत टीम स्पर्धा से की, जहां उन्होंने साथी निशानेबाज रुद्रांक्ष पाटिल और पार्थ माने के साथ मिलकर कुल 1890.1 अंक जुटाए और भारत को रजत पदक दिलाया।

इस मुकाबले में चीनी टीम 1899 अंकों के साथ पहले स्थान पर रही। इसके बाद व्यक्तिगत स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में हिमांशु ने 630.0 अंक हासिल कर सातवें पायदान के साथ फाइनल का टिकट कटाया। दबाव भरे फाइनल मुकाबले में हिमांशु ने बेहतरीन एकाग्रता दिखाई और 252.4 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल कर दूसरा सिल्वर मेडल भारत की झोली में डाल दिया। इस स्पर्धा का स्वर्ण चीन के शेंग लिहाओ (254.2 अंक) ने जीता, जबकि भारत के रुद्रांक्ष पाटिल को कांस्य पदक मिला।

जूनियर वर्ल्ड कप से नेशनल रिकॉर्ड तक, ऐसा रहा स्वर्णिम सफर

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का मान बढ़ाने वाले हिमांशु का सफर उपलब्धियों से भरा रहा है। (Haryana Sports News) साल 2025 में नई दिल्ली में आयोजित जूनियर वर्ल्ड कप में उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल और मिक्स्ड टीम इवेंट में गोल्ड जीता था।

इसके बाद 2026 की एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप में भी उन्होंने दोहरे स्वर्ण पर कब्जा जमाया। दिसंबर 2025 में भोपाल में हुई 68वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप के दौरान हिमांशु ने 634.5 का स्कोर बनाकर नेशनल और जूनियर नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किया था।

कुश्ती के अखाड़े से शूटिंग रेंज तक: बेटे के सपने के लिए पिता ने बदली राह

हिमांशु की इस कामयाबी के पीछे उनके परिवार का त्याग और अटूट समर्पण जुड़ा है। शुरुआत में हिमांशु ने कुश्ती के अखाड़े में दांव-पेच आजमाए थे, लेकिन बाद में उनका रुझान निशानेबाजी की ओर हो गया।

एसएमएल कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत पिता शमशेर ढिल्लों ने बेटे के पैशन को पहचाना और कोविड महामारी के दौरान बेहतर ट्रेनिंग सुविधाओं के लिए पूरे परिवार के साथ कैथल शिफ्ट होने का बड़ा फैसला लिया। शमशेर ढिल्लों बताते हैं कि जिस दिन बेटे ने देश के लिए तिरंगा फहराया, उस दिन सालों की मेहनत और त्याग सफल हो गया।

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