साहिल वाकोडे केस के बाद IIT बॉम्बे का फैसला, कैंपस-हॉस्टल से हटेंगे सीलिंग फैन
हॉस्टल में दीवारों पर लगाने के लिए लाए गए पंखों की तस्वीर
IIT Student Suicide Case: IIT बॉम्बे में BTech छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद संस्थान ने कैंपस और हॉस्टल के कमरों में लगे सीलिंग फैन हटाने का फैसला लिया है। इनकी जगह दीवार पर लगाए जाने वाले वॉल-माउंटेड फैन लगाए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, पंखों के डिजाइन और उनकी जगह बदलने को लेकर चर्चा जुलाई में एक अन्य छात्र की मौत के बाद शुरू हुई थी। साहिल की मौत के बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया और अब इसे लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। साहिल एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में BTech सेकंड ईयर का छात्र था। 22 वर्षीय साहिल महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का रहने वाला था और 18 सितंबर की शाम हॉस्टल के कमरे में मृत मिला था।
साहिल की मौत की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। टीम परीक्षा हॉल, पूरे कैंपस और हॉस्टल की CCTV फुटेज को जोड़कर 18 सितंबर को उसकी गतिविधियों की टाइमलाइन तैयार कर रही है। क्राइम ब्रांच के मुताबिक, 18 सितंबर को साहिल मिड-सेमेस्टर परीक्षा में शामिल हुआ था। दोपहर करीब 12:30 से 12:45 बजे के बीच परीक्षा हॉल की फुटेज में वह अपनी जेब में रखी किसी चीज को देखने के लिए झुकता दिखाई दिया, जिसके बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ने उससे सवाल किया।
करीब 1:25 बजे हॉस्टल पहुंचा था साहिल
क्राइम ब्रांच के अनुसार, परीक्षा हॉल से निकलने के बाद साहिल हॉस्टल की तरफ जाता दिखाई दिया। वह करीब 1:25 बजे अपने हॉस्टल के कमरे में पहुंचा और इसके बाद कमरे से बाहर नहीं निकला। जांच अधिकारी परीक्षा हॉल से लेकर हॉस्टल तक की फुटेज को आपस में जोड़ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया से घटना से पहले साहिल की पूरी मूवमेंट को समझने में मदद मिल सकती है, हालांकि CCTV फुटेज सार्वजनिक नहीं की गई है।
साहिल के परिवार ने मामले में जाति आधारित उत्पीड़न और भेदभाव का आरोप लगाया है। परिवार ने घटना की विस्तृत जांच के साथ मामले की CBI से जांच कराने की मांग की है। परिवार की ओर से SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया है। FIR में प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला का नाम भी शामिल है। इन आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी भी पक्ष की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
घटना के बाद IIT बॉम्बे में छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका मकसद परीक्षा के दौरान कथित एकेडमिक मिसकंडक्ट को सही ठहराना नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करना है। छात्रों ने संस्थान में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के साथ छात्र कल्याण तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर होनी चाहिए और किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी नहीं माना जाना चाहिए।
IIT बॉम्बे ने ChatGPT वाले बयान पर मांगी माफी
साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे ने 19 सितंबर को एक बयान जारी कर कहा था कि उसने परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड किया था। संस्थान के शुरुआती बयान में यह भी कहा गया था कि कथित तौर पर चीटिंग करते पकड़े जाने के बाद साहिल ने यह कदम उठाया। हालांकि, 21 सितंबर को IIT बॉम्बे ने अपना बयान वापस ले लिया और माफी मांगी। संस्थान ने कहा कि पूरी जांच पूरी होने से पहले इस तरह का बयान देना उचित नहीं था। इस बदलाव के बाद अब जांच एजेंसियों की CCTV पड़ताल और अन्य साक्ष्यों की भूमिका और अहम हो गई है। फिलहाल संस्थान की ओर से शुरुआती ChatGPT दावे को अंतिम तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा रहा है।
IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रोफेसर राजकुमार पंत के मुताबिक, प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ने परीक्षा के दौरान साहिल को गलत तरीका अपनाते हुए देखा था और संस्थान के नियमों के अनुसार कार्रवाई की थी। फैकल्टी फोरम ने कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा। प्रोफेसर पंत के मुताबिक, सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर सामने आई धारणाओं के आधार पर मामले में राय नहीं बनाई जानी चाहिए। फैकल्टी फोरम ने यह भी दावा किया कि पिछले 3-4 महीनों में जातिगत टिप्पणियों को लेकर साहिल ने IIT बॉम्बे के SC/ST सेल से संपर्क नहीं किया था और वहां उसकी कोई शिकायत दर्ज नहीं थी। यह संस्थान के पक्ष से सामने आया दावा है, जबकि परिवार ने जाति आधारित उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
प्रोफेसर दूल्ला डीन पद से हटे, प्रोफेसर पद पर कायमं
फैकल्टी फोरम ने स्पष्ट किया कि प्रोफेसर दूल्ला को प्रोफेसर के पद से निलंबित नहीं किया गया है। उन्हें सिर्फ डीन, एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स की जिम्मेदारी से हटाया गया है और वह अभी भी IIT बॉम्बे में टीचिंग फैकल्टी के सदस्य हैं। फोरम का कहना है कि जांच चलने के दौरान उन्हें पहले से दोषी मानना उचित नहीं होगा। वहीं, FIR में नाम होने के कारण उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है।
दी गई जानकारी के मुताबिक, साहिल वाकोडे की मौत इस साल IIT बॉम्बे में आत्महत्या का तीसरा मामला और देश के IIT संस्थानों में नौवां मामला बताया गया है। पिछले छह वर्षों में 2025 में IIT छात्रों की आत्महत्या के मामले सबसे ज्यादा रहे, जब 16 छात्रों की मौत की जानकारी सामने आई थी। ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 20 वर्षों में IIT के 160 छात्रों ने आत्महत्या की है। ऐसे आंकड़े उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, शिकायत व्यवस्था और कैंपस सुरक्षा से जुड़े सवालों को सामने लाते हैं। फिलहाल साहिल की मौत की जांच जारी है। CCTV फुटेज, परीक्षा हॉल में हुई घटनाओं, हॉस्टल तक उसकी गतिविधियों और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट होगी।
