Chandigarh News: नशा मुक्ति केंद्रों के मरीजों के इलाज की होगी समीक्षा, प्रशासक ने दिए रिकॉर्ड खंगालने के निर्देश
चंडीगढ़ के नशा मुक्ति केंद्रों में 69,641 फॉलोअप विजिट
Chandigarh News: शहर के नशा मुक्ति केंद्रों में 69,641 फॉलोअप विजिट के बावजूद मरीजों के उपचार का वास्तविक असर कितना हुआ, अब इसका हिसाब लिया जाएगा। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने मंगलवार को नशा मुक्त भारत अभियान के कार्यक्रम में डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज को निर्देश दिए कि लंबे समय से इलाज करा रहे मरीजों का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जाए। यह देखा जाए कि कौन मरीज कितने समय से दवा ले रहा है और उपचार के बाद उसके स्वास्थ्य में कितना सुधार हुआ। कटारिया ने अधिकारियों से साफ कहा कि मरीजों को केवल दवा देते रहना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना होगा कि दवा और उपचार का नतीजा क्या निकला। उन्होंने नशा मुक्ति उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की जरूरत और उनके इस्तेमाल की समीक्षा करने के साथ मेडिकल स्टोरों पर ऐसी दवाओं की बिक्री की निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए।
यूटी सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बताया गया कि अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच चंडीगढ़ के नशा मुक्ति उपचार केंद्रों में कुल 76,615 ओपीडी कंसल्टेशन हुए। इनमें 6,774 नए मरीजों का पंजीकरण हुआ, जबकि 69,641 फॉलोअप विजिट दर्ज की गईं। इस दौरान 1,131 मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया गया। सेक्टर-16 स्थित जीएमएसएच के नशा मुक्ति केंद्र में इसी अवधि में 3,066 ओपीडी कंसल्टेशन हुए और 101 मरीजों को भर्ती किया गया। फॉलोअप की बड़ी संख्या को देखते हुए कटारिया ने उपचार की अवधि और मरीजों की प्रगति का रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से जांचने को कहा।
कटारिया ने नशे की समस्या को स्वास्थ्य के साथ देश की सुरक्षा और भविष्य से भी जोड़ते हुए कहा कि इसका असर केवल नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति या उसके परिवार तक सीमित नहीं रहता। इससे समाज और देश की युवा शक्ति प्रभावित होती है। उन्होंने अपने संबोधन में दावा किया कि भारत को युद्ध के जरिये कमजोर करना संभव नहीं होने के कारण कुछ ताकतें दूसरे माध्यमों का इस्तेमाल कर रही हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने पाकिस्तान को माध्यम बनाकर भारत को कमजोर करने की योजनाबद्ध साजिश का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नशा बेचने वाला व्यक्ति युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के साथ इससे कमाई भी कर रहा है। कटारिया ने नशे के खिलाफ लड़ाई में समाज के हर वर्ग की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवार, समाज, शिक्षण संस्थानों और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा।
परिवार की भूमिका को बताया सबसे अहम
कटारिया ने कहा कि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को बचाने में परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। कई परिवार सामाजिक बदनामी के डर से बच्चे की नशे की समस्या छिपाते हैं, जबकि ऐसा करने के बजाय समय रहते उपचार और पुनर्वास की मदद लेनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून नशा तस्करों को सजा दे सकता है और जेल भेज सकता है, लेकिन केवल कानून के दम पर नशे को खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए जनजागरूकता और सामूहिक भागीदारी जरूरी है। कार्यक्रम में कटारिया ने नशा मुक्ति की शपथ दिलाई और एनएसएस कैडेट्स से नशा मुक्त मित्र बनकर स्कूलों-कॉलेजों में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में ठीक होने वाले व्यक्तियों तथा एसपीवाईएम, आर्ट ऑफ लिविंग, अल्कोहॉलिक्स एनॉनिमस और नार्कोटिक्स एनॉनिमस जैसी संस्थाओं को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में होम-कम-हेल्थ सेक्रेटरी मंदीप सिंह बराड़, सेक्रेटरी फिशरीज प्रदीप कुमार, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज डॉ. सुमन सिंह सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
