September 25, 2026

यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड में नया खुलासा: 19 चालान, 1.75 लाख जुर्माना फिर भी दौड़ती रही बस, कई राज्यों के दस्तावेज

0
यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड में नया खुलासा: 19 चालान, 1.75 लाख जुर्माना फिर भी दौड़ती रही बस, कई राज्यों के दस्तावेज

नोएडा बस हादसे का फॉलो-अप: 19 चालान,

Noida bus Ac fire: ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत के बाद हादसे की जांच अब बस के रिकॉर्ड और चालक दल की भूमिका तक पहुंच गई है। बुधवार देर रात दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही बस जेवर के पास आग की चपेट में आई थी। आग में 8 पुरुष और एक महिला की मौत हुई थी। हादसे के बाद सामने आए दस्तावेजों से पता चला है कि बस के खिलाफ पहले से 19 चालान दर्ज थे और इनकी रकम करीब 1.75 लाख रुपये थी। इन चालानों में परमिट, रेट्रोफिटिंग, ईंधन से जुड़े नियमों और कम उम्र के ड्राइवर से बस चलाने जैसे उल्लंघनों का रिकॉर्ड बताया गया है। इसके बावजूद बस दिल्ली-महोबा रूट पर चल रही थी। अब पुलिस यह भी जांच रही है कि इन पुराने उल्लंघनों में से किसी का बस की सुरक्षा और हादसे से कोई सीधा संबंध था या नहीं।

 

 

बिहार का रजिस्ट्रेशन, MP का मालिक और राजस्थान का फिटनेस सर्टिफिकेट

जांच में बस के दस्तावेजों का कनेक्शन कई राज्यों से सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक बस का रजिस्ट्रेशन नंबर BR32PA8647 है और यह बिहार के मधुबनी परिवहन विभाग में पंजीकृत थी। बस के मालिक का संबंध मध्य प्रदेश के छतरपुर से बताया जा रहा है और इसका संचालन राज कल्पना ट्रैवल्स द्वारा किया जा रहा था। बस का फिटनेस सर्टिफिकेट राजस्थान से और प्रदूषण प्रमाणपत्र हरियाणा से जारी होने की जानकारी भी सामने आई है। इस तरह वाहन के रजिस्ट्रेशन, मालिकाना हक, फिटनेस और संचालन से जुड़े रिकॉर्ड अलग-अलग राज्यों से जुड़े हुए मिले हैं। यही वजह है कि हादसे के बाद परिवहन विभाग की जांच सिर्फ आग लगने की वजह तक सीमित नहीं रहने वाली है। बस के परमिट, फिटनेस, रजिस्ट्रेशन, पिछले चालान और वाहन में किए गए बदलावों की भी जांच की जा रही है।

 

 

FIR में दावा- यात्रियों ने जलने की गंध बताई, फिर भी बस नहीं रुकी

हादसे के बाद दर्ज FIR में यात्री सुनील कुमार की शिकायत को आधार बनाया गया है। शिकायत के मुताबिक, हादसे से कुछ समय पहले यात्रियों को ड्राइवर केबिन की तरफ से जलने की गंध महसूस हुई थी। यात्रियों ने ड्राइवर और कंडक्टर को इसकी जानकारी दी और बस रोककर जांच करने को कहा। शिकायत में आरोप है कि दोनों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। FIR के मुताबिक, ड्राइवर और कंडक्टर के बस केबिन में धूम्रपान करने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है।

कुछ देर बाद ड्राइवर सीट के पास आग की लपटें दिखाई देने लगीं और आग तेजी से बस के अंदर फैल गई। यात्रियों में भगदड़ मच गई। कुछ लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। पुलिस ने ड्राइवर पवन और कंडक्टर योगेश को गिरफ्तार कर लिया है। अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि आग लगने की शुरुआती सूचना मिलने के बाद बस को तत्काल क्यों नहीं रोका गया और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए क्या कदम उठाए गए।

 

 

19 चालान में कम उम्र के ड्राइवर का मामला भी शामिल

बस के पुराने रिकॉर्ड में सबसे गंभीर बिंदुओं में से एक कम उम्र के ड्राइवर से वाहन चलाने से जुड़ा चालान है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में दिल्ली-नोएडा सीमा के पास इस बस के खिलाफ कम उम्र के ड्राइवर से वाहन चलाने को लेकर कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा जून 2025 में बस के रेट्रोफिटिंग और ईंधन से जुड़े नियमों के उल्लंघन का चालान भी दर्ज बताया गया है। परमिट से जुड़े उल्लंघनों पर भी कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने आया है। अब बड़ा सवाल यह है कि इतने चालानों के बावजूद बस का संचालन जारी कैसे रहा। इस पहलू पर परिवहन विभाग और पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है। हालांकि, सिर्फ चालानों की संख्या के आधार पर हादसे की वजह तय नहीं की जा सकती। आग की तकनीकी वजह और बस की फिटनेस के बीच संबंध जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

 

 

मृतकों की पहचान में मुश्किल, पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजन

आग इतनी भीषण थी कि बस के अंदर मिले शवों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। गुरुवार को कई परिवार पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और अपने परिजनों के बारे में जानकारी का इंतजार करते रहे। पुलिस यात्रियों के रिकॉर्ड और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। हादसे में यात्रियों के मोबाइल फोन, सामान और बैग भी जल गए। इससे पहचान की प्रक्रिया और मुश्किल हो गई है। जरूरत पड़ने पर DNA जांच का सहारा लिया जाएगा। परिजनों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि बस में कुल कितने लोग सवार थे और उनमें से कितने सुरक्षित निकले। अलग-अलग जगहों से यात्रियों के बस में बैठने के कारण पुलिस को पूरी यात्री सूची तैयार करने में भी दिक्कत आ रही है।

शुरुआती जांच में AC सिस्टम में स्पार्क या ब्लास्ट से आग लगने की आशंका सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक AC से शुरू हुई आग इंजन के लुब्रिकेटिंग ऑयल तक पहुंची और इसके बाद तेजी से फैल सकती है। हालांकि, यह अभी प्रारंभिक जांच का हिस्सा है और अंतिम कारण तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा। बस से एक सिलेंडर और बड़ी मात्रा में नेल पॉलिश मिलने की बात भी सामने आई है। जांच अधिकारी यह पता कर रहे हैं कि बस में रखी इन चीजों ने आग फैलने में कोई भूमिका निभाई या नहीं।

 

 

मृतकों के परिवारों को 2 लाख, घायलों को 50 हजार की मदद

हादसे के बाद केंद्र सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये और प्रत्येक घायल को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी मृतकों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रशासन का कहना है कि मृतकों की पहचान और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। अब जांच का फोकस तीन प्रमुख सवालों पर है—बस में आग किस वजह से लगी, यात्रियों की शुरुआती शिकायत के बाद बस क्यों नहीं रोकी गई और इतने पुराने चालान व अलग-अलग दस्तावेजों के बावजूद वाहन का संचालन कैसे जारी रहा। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed