Kewal Singh Dhillon लुधियाना में नशा पीड़ितों से मिले, 6 बेटों को खोने वाली शिंदो माई का दर्द सुना
Kewal Singh Dhillon लुधियाना में नशा पीड़ितों से मिले, 6 बेटों को खोने वाली शिंदो माई का दर्द सुना
Kewal Singh Dhillon : पंजाब में नशे का दंश किस कदर परिवारों की खुशियां और आने वाली नस्लों को लील रहा है, इसकी एक झकझोर देने वाली तस्वीर आज लुधियाना में देखने को मिली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता Kewal Singh Dhillon ने जिला अध्यक्ष सुनील मौदगिल व अन्य पदाधिकारियों के साथ लुधियाना पहुंचे और नशे की वजह से अपनों को गंवा चुके परिवारों से मुलाकात की।
मुलाकात के दौरान जब जगराओं की रहने वाली शिंदो माई ने अपनी आपबीती सुनाई, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। शिंदो माई के छह बेटों की मौत नशे की ओवरडोज और इससे जुड़ी बीमारियों की वजह से हो चुकी है। इस त्रासदी को सुनते ही केवल ढिल्लों ने भगवंत मान सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि राज्य में नशा तस्करी पर रोक लगाने के सरकारी दावे पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं।
एक ही घर से उठीं 6 अर्थियां : जगराओं की शिंदो माई की आपबीती ने झकझोरा
नशे के खिलाफ जमीनी हकीकत जानने निकले Kewal Singh Dhillon ने मीडिया से बात करने से पहले पीड़ितों के बीच जाकर उनकी जमीनी समस्याएं और परिस्थितियां समझीं। शिंदो माई की व्यथा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस मां ने अपने छह नौजवान बेटों के शवों को अपने हाथों से विदा किया हो, उसका दर्द बयां करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं।
ढिल्लों ने आरोप लगाया:
“आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले पंजाब को कुछ ही महीनों में नशा मुक्त करने की बड़ी-बड़ी गारंटी दी थीं। लेकिन आज हकीकत यह है कि नशा गलियों और मोहल्लों में पहले से ज्यादा आसानी से बिक रहा है। पुलिस प्रशासन और तस्करों के बीच की सांठगांठ ने सूबे के युवाओं को गर्त में धकेल दिया है।”
उन्होंने कहा कि भाजपा चुप बैठने वाली नहीं है और जल्द ही इस मुद्दे को लेकर एक व्यापक राज्यस्तरीय रणनीति बनाकर सरकार की जवाबदेही तय की जाएगी।
कांग्रेस के कद्दावर नेता से भाजपा कोर कमेटी तक: जानिए कौन हैं केवल सिंह ढिल्लों
मालवा क्षेत्र की राजनीति में Kewal Singh Dhillon एक बड़ा और जाना-माना चेहरा हैं। लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी का प्रमुख स्तंभ रहे ढिल्लों को पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का बेहद भरोसेमंद माना जाता था। राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो:
बरनाला से दो बार विधायक: वे 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में Kewal Singh Dhillon बरनाला सीट से कांग्रेस के टिकट पर लगातार विधायक चुने गए। बरनाला को अलग जिले का दर्जा दिलाने की राजनीतिक कवायद में उनका योगदान बेहद अहम माना जाता है।
चुनावी उतार-चढ़ाव: 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें आम आदमी पार्टी के गुरमीत सिंह मीत हेयर से शिकस्त झेलनी पड़ी। इसके बाद 2019 के संगरूर लोकसभा चुनाव में वे भगवंत मान के मुकाबले दूसरे स्थान पर रहे।
2022 में थामा भाजपा का दामन: 4 जून 2022 को Kewal Singh Dhillon ने कांग्रेस को अलविदा कहकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए 2022 के संगरूर लोकसभा उपचुनाव में अपना प्रत्याशी बनाया। वर्तमान में वे पंजाब भाजपा की कोर कमेटी के अहम सदस्य के रूप में संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।
