Jat Dharamshala Farmers Meeting: कुरुक्षेत्र जाट धर्मशाला में 9 किसान यूनियनों की महापंचायत, किसानों ने मांगी 20 किमी के दायरे में किसी भी मंडी की छूट
कुरुक्षेत्र जाट धर्मशाला में 9 किसान यूनियनों की महापंचायत
Jat Dharamshala Farmers Meeting: हरियाणा में धान खरीद का सीजन शुरू होते ही किसान और सरकार एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। खरीद नियमों में ढिलाई और ‘कैपिंग’ (प्रति एकड़ खरीद की निर्धारित सीमा) के विरोध में किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को कुरुक्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय जाट धर्मशाला में ‘किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा हरियाणा’ के बैनर तले प्रदेश के 9 प्रमुख किसान संगठनों ने साझा बैठक की। इस महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने अपनी कड़े नियमों वाली नीति में बदलाव नहीं किया, तो 4 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में सरकार के पुतले फूंके जाएंगे और सभी जिलों में मार्केट कमेटी कार्यालयों का घेराव किया जाएगा।
बैठक में मौजूद किसान नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार एक तरफ तो ज्यादा पैदावार का दावा करती है और दूसरी तरफ मंडियों में फसल बिकने के समय पाबंदियों का जाल बिछा देती है।
जब तकनीक और बीज बेहतर, तो खरीद पर पाबंदी क्यों? — संजू नंबरदार
बैठक के दौरान शहीद भगत सिंह किसान यूनियन के जिला प्रधान एडवोकेट संजू नंबरदार ने सरकार की विरोधाभासी नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी कृषि विश्वविद्यालय और सर्टिफाइड कंपनियां लगातार ऐसी किस्मों के बीज तैयार कर रही हैं, जिनसे प्रति एकड़ पैदावार ज्यादा होती है। सरकार खुद किसानों को अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करती है, लेकिन जब किसान मेहनत करके मंडी में फसल लेकर पहुंचता है, तो प्रति एकड़ खरीद की एक सीमित कैपिंग थमा दी जाती है।
उन्होंने मांग की कि मंडियों में वास्तविक उत्पादन के हिसाब से ही पूरी फसल की खरीद की जाए और धान खरीद से कैपिंग का नियम तुरंत प्रभाव से खत्म किया जाए।
20 किलोमीटर के दायरे में बिक्री की मिले छूट: जगदीप औलख
सर छोटूराम किसान यूनियन (करनाल) के प्रधान जगदीप औलख ने किसानों के सामने आ रही भौगोलिक समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई बार किसान के खेत से उसके अपने जिले की मंडी काफी दूर होती है, जबकि पड़ोसी जिले की मंडी महज कुछ ही दूरी पर स्थित होती है।
औलख ने मांग रखी कि जिले की प्रशासनिक सीमा के बजाय किसान के खेत या गांव से 20 किलोमीटर की दूरी को आधार माना जाना चाहिए। किसान को इस बात की पूरी आजादी होनी चाहिए कि वह 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाली किसी भी मंडी में अपनी फसल बेच सके, चाहे वह मंडी किसी भी जिले में पड़ती हो।
पोर्टल और वेरिफिकेशन की लाचारी दूर करे सरकार
बैठक में ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल और वेरिफिकेशन सिस्टम के कारण मंडियों में लग रहे लंबे जाम और किसानों की परेशानी पर भी गहरा रोष जताया गया। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि वेरिफिकेशन की जटिल प्रक्रिया को तुरंत सरल बनाया जाए ताकि किसानों को मंडी में दिन-रात इंतजार न करना पड़े।
किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने 3 अक्टूबर तक उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं दिखाया, तो 4 अक्टूबर को राज्यभर में उग्र प्रदर्शन, पुतला दहन और मार्केट कमेटियों पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा।
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