Haryana Milk Strike: ‘दूध बंद’ आंदोलन के तीसरे दिन सिरसा वीटा प्लांट सील, किसानों ने रोकीं दूध की गाड़ियां
'दूध बंद' आंदोलन के तीसरे दिन सिरसा वीटा प्लांट सील, किसानों ने रोकीं दूध की गाड़ियां
Haryana Milk Strike: हरियाणा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ ‘दूध बंद’ आंदोलन अब प्रशासनिक और सार्वजनिक स्तर पर बड़ा रूप लेता जा रहा है। आंदोलन के तीसरे दिन शनिवार को गुस्साए किसानों और पशुपालकों ने सिरसा स्थित वीटा मिल्क प्लांट पर धावा बोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्लांट के मुख्य द्वार को घेरकर धरना शुरू कर दिया है और दूध लेकर आने-जाने वाले सभी वाहनों को गेट पर ही रोक दिया। किसानों की इस घेराबंदी के कारण प्लांट के अंदर दूध की सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ गई है।
दूसरी ओर, आंदोलनकारी किसानों ने आरोप लगाया कि जब गांवों से पशुपालक दूध नहीं बेच रहे हैं, तो वीटा प्लांट तक दूध की गाड़ियां कैसे पहुंच रही हैं? किसानों का सीधा दावा है कि डेयरी संचालकों और दूधियों के जरिए प्लांट में पहुंचाया जा रहा यह दूध नकली और मिलावटी है, जिसकी तत्काल खाद्य सुरक्षा विभाग से जांच कराई जानी चाहिए। आंदोलन की भावी रणनीति तय करने के लिए किसानों ने वीटा प्लांट परिसर में ही एक आपात बैठक भी बुलाई है।
कंगनपुर रोड पर हंगामा: छीने गए दूध के कैन, चिल्ला साहिब गुरुद्वारा भेजा गया 1000 लीटर दूध
इससे पहले शुक्रवार को सिरसा के कंगनपुर रोड पर उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब प्रदर्शनकारी किसानों ने सड़क से गुजर रहे दूधियों और डेयरी संचालकों को जबरन रोक लिया। कंगनपुर निवासी डेयरी संचालक प्रतीक बिश्नोई के अनुसार, जमा हुए लोगों ने कंगनपुर रोड से गुजर रही दूध की गाड़ियों व कैनों को कब्जे में ले लिया। देखते ही देखते करीब 1000 लीटर से अधिक दूध इकट्ठा कर लिया गया।
मौके पर मौजूद बच्चों, युवाओं और राहगीरों को पहले तो वहीं दूध पिलाया गया, जिसके बाद बाकी बचे दूध को कंगनपुर के स्थानीय मंदिरों, गुरुघर और प्रसिद्ध चिल्ला साहिब गुरुद्वारा, सिरसा भिजवा दिया गया। इस दौरान कुछ जगह दूधियों के साथ तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई, जिसके बाद स्थिति पर काबू पाने के लिए भारी पुलिस बल को मोर्चा संभालना पड़ा।
गुरुद्वारा कमेटी बोली— ‘हम किसानों के साथ’, चिलिंग सेंटरों में घटने लगी दूध की आवक
किसानों के इस कदम पर धार्मिक संस्थाओं का समर्थन भी सामने आने लगा है। ऐतिहासिक चिल्ला साहिब गुरुद्वारा के प्रबंधक बाबा जगतार सिंह ने स्पष्ट किया कि गुरुघर हमेशा से अन्नदाताओं और जमींदारों के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल से लेकर किसान आंदोलनों तक गुरुघर से लंगर व दूध की सेवा भेजी जाती रही है। कंगनपुर और रानियां रोड से जो भी दूध संगत के माध्यम से गुरुघर पहुंच रहा है, उसका उपयोग रोजाना बनने वाले अटूट लंगर में किया जा रहा है। कंगनपुर गुरुघर के प्रधान पुष्पेंदर सिंह ने भी पुष्टि की कि गांव से एकत्र दूध को चिल्ला साहिब भेजा गया है।
दूसरी तरफ, आंदोलन के चलते वीटा के रानियां स्थित चिलिंग सेंटर पर भी गहरा असर देखने को मिल रहा है। 15 हजार लीटर स्टोरेज क्षमता वाले इस चिलिंग सेंटर में संत नगर, जीवन नगर, मोहम्मदपुरिया और बालासर जैसे प्रमुख गांवों से दूध की आवक न के बराबर रह गई है। चिलिंग सेंटर के स्टाफ के मुताबिक, अमूमन फुल रहने वाले इस सेंटर में अब औसतन केवल 4100 से 4200 लीटर दूध ही पहुंच पा रहा है। अगर यह आंदोलन दो-तीन दिन और खिंचा, तो शहरों में दूध का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
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