Yamunanagar Rice Mill Auction: 1.85 करोड़ में नीलाम हुई न्यू किसान राइस मिल, 70 करोड़ घोटाले पर 323 दिन बाद भी चुप्पी
1.85 करोड़ में नीलाम हुई न्यू किसान राइस मिल, 70 करोड़ घोटाले पर 323 दिन बाद भी चुप्पी
Yamunanagar Rice Mill Auction: खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की कार्यशैली और रिकवरी नीति पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। विभाग का दोहरा रवैया इस बात से साफ जाहिर होता है कि जहां छोटे बकाएदारों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए संपत्ति तक नीलाम कर दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ 70 करोड़ (70 crore paddy scam Haryana) रुपये के विशालकाय धान घोटाले में अफसरों और रसूखदारों के आगे विभाग लाचार नजर आ रहा है।
पौंटी गांव स्थित दो राइस मिलों के मामले में विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए डीएफएससी (DFSC Yamunanagar rice mill auction) के माध्यम से जमीन, शेड और पूरी मशीनरी अपने कब्जे में लेकर 1.85 करोड़ रुपये में नीलाम कर दी।
इसके ठीक विपरीत, करोड़ों रुपये के धान घोटाले को सामने आए 323 दिन का लंबा वक्त गुजर चुका है। इस प्रकरण में केवल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और चार कर्मचारी बर्खास्त किए गए, जबकि 30 से अधिक अधिकारी व कर्मचारी जांच की आंच में तप रहे हैं। इसके बावजूद अब तक न तो सरकारी नुकसान की भरपाई के लिए किसी की संपत्ति जब्त हुई और न ही रिकवरी की कोई ठोस प्रक्रिया शुरू हो सकी।
किसान राइस मिल पर कसता शिकंजा: 1.85 करोड़ में बिकी 14 कनाल जमीन व मशीनरी
विभाग की ओर से 26 मई 2026 को संचालक जावेद खान की ‘किसान राइस मिल’ (Paunti Kisan Rice Mill auction )और ‘न्यू किसान राइस मिल’ (पौंटी) की संपत्तियों की नीलामी की गई थी। बता दें कि जावेद खान के खिलाफ सदर थाना जगाधरी में अक्टूबर 2025 में केस दर्ज किया गया था। इस नीलामी में 14 कनाल 10 मरला जमीन, ड्रायर, मिलिंग मशीनरी और शेड सहित तमाम चल-अचल संपत्ति शामिल थी।
विभाग द्वारा रखी गई 1.79 करोड़ 90 हजार रुपये की रिजर्व प्राइस के मुकाबले मलिकपुर खादर निवासी रामंदीप सिंह ने 1.85 करोड़ रुपये की सर्वोच्च बोली लगाकर इस संपत्ति को अपने नाम किया।
करोड़ों का चावल डकार गए मिलर्स, कागजों में ही होता रहा हिसाब
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, ‘न्यू किसान राइस मिल’ को कुल 44,900.625 क्विंटल धान आवंटित किया गया था, जिसके बदले भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास 30,083.42 क्विंटल चावल जमा कराया जाना था। हालांकि, मिल की ओर से केवल 23,490 क्विंटल चावल ही जमा किया गया और जांच में 6,629.94 क्विंटल चावल कम पाया गया। सभी समायोजनों के बाद इस मिल पर 2 करोड़ 96 लाख 2 हजार 567 रुपये की सीधी देनदारी बनी।
इसी तरह, ‘किसान राइस मिल’ पर हैफेड (HAFED) ने 9,994.665 क्विंटल चावल गायब करने का आरोप लगाया था, जिसकी बाजारू कीमत करीब 4.57 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इन मामलों में तो विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर नीलामी का चाबुक चला दिया, लेकिन 70 करोड़ रुपये के वृहद घोटाले पर विभागीय सुस्ती जनता और करदाताओं के गले नहीं उतर रही है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बड़े घोटालेबाजों पर मेहरबानी और छोटे मिलर्स पर कड़ाई की यह नीति किसके इशारे पर चल रही है?
