मोहाली में घग्गर नदी में अवैध खनन की सूचना पर पुलिस की रेड, 7 लोगों पर मामला दर्ज
मोहाली में घग्गर नदी में अवैध माइनिंग का आरोप
Mohali Illegal Mining: मोहाली के जीरकपुर और आसपास के इलाकों में घग्गर नदी के किनारे खनन को लेकर पुलिस ने कार्रवाई की है। ढकोली पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार रात सूचना मिली थी कि पीर मुछल्ला इलाके से गुजर रही घग्गर नदी में बिना सरकारी मंजूरी के खनन किया जा रहा है। सूचना में बताया गया था कि खनन के लिए JCB और टिप्परों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने बिना देरी किए मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों को कार्रवाई की भनक लग गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी JCB और टिप्पर समेत इस्तेमाल की जा रही मशीनरी लेकर मौके से निकल गए। इसके बाद टीम ने वहां मौजूद स्थिति की जांच की और अवैध खनन से जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की।
पुलिस को देखते ही मशीनरी लेकर भागे आरोपी
पुलिस की कार्रवाई में सबसे अहम बात यह सामने आई कि मौके पर खनन के लिए इस्तेमाल की जा रही मशीनरी वहां नहीं मिली, क्योंकि पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी उसे लेकर फरार हो गए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मौके पर कितनी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा था और उसे वहां कौन लेकर आया था। JCB और टिप्परों के मालिकों की जानकारी जुटाना भी जांच का हिस्सा है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या मशीनरी किसी ठेकेदार या खनन से जुड़े कारोबारी की थी या फिर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत है। वाहन और मशीनरी के रिकॉर्ड से मामले में शामिल लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
ढकोली पुलिस ने इस मामले में कुल 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें मोहाली निवासी विकास सिंगला और पिंजौर निवासी यासीन को नामजद किया गया है। पुलिस के अनुसार, बाकी 5 आरोपियों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। इन लोगों की पहचान के लिए पुलिस मौके से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध जानकारी को खंगाल रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि मौके पर मौजूद सभी लोग खनन गतिविधि में सीधे तौर पर शामिल थे या उनकी कोई अन्य भूमिका थी। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश के साथ उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
BNS और माइनिंग एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला
मामले में पुलिस ने BNS की धारा 303(2) और माइनिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। अब जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि खनन के लिए किसी तरह की सरकारी अनुमति थी या नहीं और अगर अनुमति नहीं थी तो किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ। अवैध खनन के मामलों में सिर्फ मौके पर मशीनरी पकड़े जाने या नहीं पकड़े जाने से जांच खत्म नहीं होती। संबंधित स्थान, खनन की अनुमति, मशीनरी, परिवहन और निकाले गए खनिज या अन्य सामग्री से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। इसी वजह से पुलिस अब उस पूरी गतिविधि की कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है, जिसमें नदी क्षेत्र से कथित तौर पर खनन किया जा रहा था।
मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि घग्गर नदी में कथित तौर पर खनन कब से चल रहा था। फिलहाल पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह गतिविधि केवल शुक्रवार रात तक सीमित थी या पहले से भी वहां खनन किया जा रहा था। जांच में अगर लंबे समय से खनन किए जाने के तथ्य सामने आते हैं तो पुलिस को गतिविधि की अवधि, इसमें शामिल लोगों और इस्तेमाल की गई मशीनरी के बारे में और जानकारी जुटानी होगी। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खनन के बाद निकाली गई सामग्री को कहां ले जाया जाता था। इसके लिए टिप्परों की आवाजाही और उनसे जुड़े रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
सरकार को कितना राजस्व नुकसान हुआ, इसकी भी जांच
अवैध खनन से जुड़े मामलों में सिर्फ नियमों के उल्लंघन की जांच नहीं होती, बल्कि सरकारी राजस्व के संभावित नुकसान का आकलन भी किया जाता है। इसी कड़ी में पुलिस यह पता लगा रही है कि अगर घग्गर नदी से बिना अनुमति खनन हुआ तो उससे सरकार को कितना आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसके लिए कथित तौर पर निकाली गई सामग्री की मात्रा, खनन की अवधि और इस्तेमाल की गई मशीनरी समेत दूसरे तथ्यों की जांच की जाएगी। जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में राजस्व नुकसान से जुड़ी तस्वीर भी स्पष्ट हो सकती है।
पीर मुछल्ला और जीरकपुर क्षेत्र से गुजरने वाली घग्गर नदी का इलाका लंबे समय से स्थानीय गतिविधियों और प्रशासनिक निगरानी के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। नदी क्षेत्र में बिना अनुमति खनन होने से संबंधित विभागों के लिए निगरानी और कार्रवाई का सवाल भी उठता है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद अब यह भी देखा जाएगा कि संबंधित विभाग की ओर से मौके का निरीक्षण किया जाता है या नहीं और कथित खनन से प्रभावित क्षेत्र का आकलन कैसे किया जाता है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है। साथ ही नामजद आरोपियों और अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। मशीनरी के मालिकों, कथित खनन की अवधि और इससे हुए संभावित राजस्व नुकसान का पता जांच आगे बढ़ने के बाद ही चलेगा।
